श्रीगुरू उवाच


धर्मद्रोहियोंके विचारोंका खण्डन करना, यह समष्टि साधना है !   
इसकारण धर्मद्रोहियोंके विचार अयोग्य हैं, यह कुछ व्यक्तियोंके भी संज्ञानमें आए तो वे योग्य मार्गसे गमन करते हैं ।



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