श्रीगुरु उवाच


साधको, चारों वर्णानुसार साधना नहीं कर पा रहे हैं; ऐसेमें व्यथित न हों !
धर्मरक्षणके वर्णानुसार अग्रिम चार प्रकार हैं । कुछ साधक सोचते हैं कि चारों वर्णानुसार साधनाकर शीघ्र प्रगति करें ! वे यह समझ लें कि केवल ईश्वर ही चारों वर्णानुसार साधनाके उदाहरण हमारे समक्ष रख सकते हैं । हमारे पास बुद्धि, धन, शारीरिक क्षमता, इनमेंसे जो भी हो उसे अर्पण करना साधनामें अपेक्षित होता है; इसलिए अपनेसे जो १-२ वर्णोंकी सेवा हो सके वही करें, इससे भी शीघ्र उन्नति होगी ।– परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था (७.११.२०१५)
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)



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