‘किसानोंको अवकाश नहीं । वे सप्ताहके सातों दिवस कष्ट सहकर कृषिका कार्य करते हैं, तो भी वह निर्धन होते हैं । इसके विपरीत शासकीय कर्मचारी सप्ताहके पांच दिवस कार्य करते हैं और उनका कार्य कष्टप्रद भी नहीं होता है; इसलिए निर्धनता क्या होती है, यह उन्हें ज्ञात नहीं होता ।’ – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था (साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात)
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