मार्च ५, २०१९
कॉन्ग्रेसका न रफाल चला और न ही अन्य कोई प्रकरण मिला, जिससे मोदीको घेरा जाए, रही सही कमी ‘एयर स्ट्राइक’ने पूर्ण कर दी । इसके उपरान्त भी घूम-फिरकर निरन्तर निराधार वक्तव्योंसे ही चुनावी वातावरणको भुनानेका प्रयास जारी है ।
वर्तमान प्रकरण पूर्व कॉन्ग्रेस मुख्यमन्त्री सिद्धारमैयाका है । उन्हें अब तिलक और भभूत लगाए सामान्य हिन्दुओंसे भय लगने लगा है ! अपने तथाकथित भयको कर्नाटकके बदामीके एक कार्यक्रममें प्रकट करते हुए सिद्धारमैयाने कहा, “मुझे उन लोगोंसे अत्यधिक भय लगता है, जो कुमकुम और भस्मका लम्बा टीका लगाते हैं ।”
#WATCH Former Karnataka CM and Congress leader Siddaramaiah, says, "I am scared of people who put long tikas with kumkum or ash", at an event, in Badami, Karnataka, yesterday pic.twitter.com/2UMjVI3DkL
— ANI (@ANI) March 6, 2019
यद्यपि, ऐसा कहते हुए सिद्धारमैया अपनी स्वयंकी तिलक लगानेकी घटना भूल जाते हैं या उन्हें अपने ही दलके अन्य नेता स्मरण नहीं होते, जो स्वयंको जनेऊधारी रामभक्त और शिवभक्त सिद्ध करनेके लिए निरन्तर लम्बा टीका लगाए घूम रहे हैं ।

यहां उनके ही दल कॉन्ग्रेसके उच्चपदस्थ नेताओंके कुछ चित्र हैं, जिसे आप देख सकते हैं ।
सर्वेसर्वा सोनिया गांंधी
प्रियंका गांंधी
मंदिर-मंदिर टहलते लम्बा टीका लगाए अध्यक्ष राहुल गांंधी
टीकाधारी राहुल गांंधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया
“तिलक सनातन परम्पराका वह अंग है, जिसमें इसे धारण करना अत्यावश्यक बताया गया है; क्योंकि इससे मेधा शक्तिका विकास होता है और तामसिक व नकारात्मक ऊर्जासे दूर रहते हैं; परन्तु सिद्धारमैयाको क्यों भय लगता है ?, यह समझसे परेय है, जबकि उन्होंने स्वयं ही व उनके दलके नेताओंने तिलक धारण किया है ! यह कुछ और नहीं इनकी अवसरवादिताको ही दिखाता है । ऐसे लोगोंके लिए धर्मका कोई अर्थ नहीं होता है, जहां वोट मिले उसीको ही उचित बताते हैं । चूंकि ऐसे नेताओंकी वृत्ति मूलतः तामसिक होती है तो सात्विकताकाके प्रतीक तिलकसे भय लगना स्वभाविक है; परन्तु फिर भी उन्हें इसे धारण करना चाहिए, क्योंकि इसमें उनका कल्याण ही निहित है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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