‘ट्रैक्टर लेकर संसद भवनपर खालिस्तानी ध्वज फहरा दो’, ‘SFJ’ने किया ९४ लाखके पुरस्कारकी घोषणा, देहली ‘पुलिस’ सतर्क


२७ नवम्बर, २०२१
      मोदी शासनने तीनों कृषि विधानोंको ‘वापस’ लेनेका निर्णय ले लिया है । उसके पश्चात भी प्रदर्शनकारी किसान आन्दोलनको ‘जारी’ रखनेपर अडे हुए हैं ।
      प्रतिवेदनके अनुसार, ऐसे प्रकरण उजागर हुए हैं, जहां ‘सिख फॉर जस्टिस’का मुखिया गुरुपवंत सिंह पन्नू, किसानोंके संसद ‘मार्च’के समाचारको ध्यानमें रखते हुए ध्वनि मुद्रित (रिकॉर्डेड ऑडियो) सन्देश भेजकर लाल दुर्गकी (किलेकी) भांति ही, २९ नवम्बरको देशकी संसदपर ‘खालिस्तान’के ध्वज लगानेके लिए ‘उकसा’ रहा है । उसने कहा, “ट्रैक्टरको शास्त्र बनाकर तुम २९ नवम्बरको खालिस्तानके केसरी ध्वजको भारतकी संसदपर चढा दो । ‘सिख फॉर जस्टिस’ सवा लाख ‘डॉलर’का (९३,८१,६२५ भारतीय रुपएका) पुरुस्कार देगी । २९ नवम्बरको ‘खालिस्तान’ केसरी चढा दो भारतकी संसदपर । पंजाब, किसान, हल ‘खालिस्तान’ ।”
      इस मध्य देहलीके ‘पुलिस’ आयुक्त राकेश अस्थानाने विधान व्यवस्थाके विषयपर प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि किसी भी परिस्थितिमें ‘लॉ एन्ड ऑर्डर’को बिगडने करने नहीं दिया जाएगा । अस्थानाने ये भी कहा कि ‘बीट पेट्रोलिंग’को और अधिक सशक्त किया गया है ।
      ‘खालिस्तानी’ आतङ्कवादी कृषि विधान निरस्त होनेके अवसरका लाभ लेने हेतु, भडकाऊ वक्तव्य दे रहे है । पुलिसद्वारा उपद्रव फैलानेवालोंको त्वरित बन्दी बनाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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