असम पुलिसपर आक्रमण के पीछे ‘पापुलर फ्रंट आफ इंडिया’ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाने जताया सन्देह
२६ सितम्बर, २०२१
असममें दर्रांग जनपदमें शनिवार, २५ सितंबरको मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाका अतिक्रमण अभियानके मध्य हुई सिपझार हिंसाके पश्चात वक्तव्य आया है कि इस हिंसामें ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’का हाथ होनेपर संदेह जताया है ।
यह अभियान बुधवारतक सुचारू रूपसे चला और गुरुवारको केवल ६० परिवारको हटाना पडा; परन्तु लाठियोंके साथ लगभग १०००० लोगोंने पुलिसको घेर लिया था, जिसके पश्चात उन्हें भी कार्यवाही करनी पडी । कमसे कम दो लोगोंकी मृत्यु हो गई और २० अन्य चोटिल हो गए थे ।
आप केवल एक ३० सेकेंडके चलचित्रको आधार बनाकर असम शासनको बदनाम नहीं कर सकते । उससे पूर्व और उसके पश्चात क्या हुआ थाल, ये देखना पडेगा। समग्र दृष्टिकोणसे घटनाको देखिए ।
ज्ञात हो कि ‘पीएफआई’का हिंसा करनेका बहुत पुराना इतिहास है । नागरिकता संशोधन अधिनियमके मद्देनजर हिन्दू विरोधी देहली दंगों और देश भरमें हिंसाकी जांचके मध्य, ‘पीएफआई’की भूमिका संदिग्ध रही है और ‘पीएफआई’के कई सदस्योंको दंगोंमें सम्मिलित होने के कारण बन्दी बनाया गया था।
ऐसे जिहादियोंके कारण ही तो भारत देशके अन्य हिस्सोंमें भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं । इन स्वार्थी दलों या उचित कार्यवाही अनुसार कारावासमें बन्द कर देना चाहिए । मुख्यमंत्री जीका यह प्रयास सराहनीय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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