फरवरी ११, २०१९
कर्नाटकके पूर्व मुख्यमन्त्री और मनमोहन शासनमें विदेश मन्त्रीका दायित्व सम्भाल चुके कांग्रेसके पूर्व नेता एस.एम. कृष्णाने एक अचम्भित करनेवाला वक्तव्य दिया है । उन्होंने कहा कि काममें राहुल गांधीके निरन्तर हस्तक्षेपके कारण उन्हें शासन और कांग्रेस पार्टीसे पृथक होना पडा । भाजपामें सम्मिलित हो चुके कृष्णाने कहा कि उन्हें दलसे पृथक होनेके लिए विवश किया गया । उन्होनें कहा कि मुझे विदेश मन्त्रीका पद इसलिए छोडना पडा; क्योंकि राहुलके निरन्तर हस्तक्षेपके कारण मेरा उत्तरदायित्व सम्भाल पाना कठिन हो चुका था । उन्होंने २०१७ में दल छोडनेको लेकर भी बात की ।
कृष्णाने कहा कि १० वर्ष पूर्व राहुल गांधी केवल एक सांसद थे और पार्टीमें किसी पदपर नहीं थे; परन्तु वह प्रत्येक कार्यमें हस्तक्षेप करते थे । मनमोहन सिंह प्रधानमन्त्री थे; परन्तु कई निर्णय उनकी जानकारीके बिना लिए जाते थे । गठबन्धनके घटक दलोंपर कोई नियन्त्रण नहीं था, उसी मध्य ‘२-जी स्पेक्ट्रम’, ‘कॉमनवेल्थ’ और कोयला भ्रष्टाचार उजागर हुआ था । पार्टीके पास कोई योग्य नेतृत्व नहीं था ।
उन्होंने कहा कि २००९ से २०१४ के मध्य मैं भी शासनका अंग था; अतः प्रत्येक बुरी और अच्छी चीजका मैं भी भागीदार हूं । तबके प्रधानमन्त्रीका अपने मन्त्रियों और शासनपर कोई नियन्त्रण नहीं था । सबकुछ राहुल गांधीके नियन्त्रणमें था, जो एक अतिरिक्त संवैधानिक संस्थाकी भांति कार्य कर रहे थे । साढे तीन वर्षोंतक प्रभावी कार्य करनेके पश्चात मुझे राहुल गांधीके ८० वर्षोंके पारके लोगोंका शासनका भाग नहीं रहनेके आदेशके पश्चात पृथक होना पडा ।
कांग्रेसकी ओरसे प्रतिक्रिया देते हुए नेता दिनेश गुंडू रावने कहा कि राहुल गांधीपर एसएम कृष्णाका वक्तव्य सुननेके पश्चात कृष्णाके लिए जो एक प्रतिशत सम्मान था, वो भी समाप्त हो गया । राजनीतिमें इस पदके व्यक्तिका ऐसी बात कहना एकदम निरर्थक है । मुझे नहीं ज्ञात कि किस कारणसे वह ऐसी बातें कह रहे हैं ?
भाजपामें सम्मिलित होनेके पश्चात एसएम कृष्णा सक्रीय राजनीतिसे दूर रहे हैं; परन्तु गत विधानसभा चुनावमें उन्होंने मुख्यमन्त्री सिद्दारमैयाके विरुद्घ प्रचार किया था । लोकसभा चुनावसे पूर्व एकाएक उनका सक्रिय होना उनके गृह क्षेत्र मद्दुरके मतदाताओंको प्रभावित करनेके प्रयासके रूपमें देखा जा रहा है । प्रधानमन्त्री मोदीके नेतृत्वकी प्रशंसा करते हुए उन्होंने उनकी तुलना सरदार पटेलसे करते हुए कहा कि मोदी राजमें भारत तीव्रतासे प्रगति कर रहा है ।
“राहुल गांधी प्रधानमन्त्री मोदीपर तानाशाह होनेका व देशके संविधानको नष्ट करनेका आरोप लगाते रहे हैं और दूसरी ओर एक पार्टीमें ही संविधान पारित कर पा रहे हैं कि योग्यता न होते हुए भी केवल अपनी उपस्थिति दिखानेके लिए योग्य लोगोंके कार्यमें हस्तक्षेप कर रहे हैं तो क्या वे अब इसपर कुछ कहना चाहेंगें ? देश व संविधानको क्या एक ऐसा प्रधानमन्त्री नष्ट कर रहा है, जो देशहितमें संलग्न है अथवा वे लोग जिनमें न ही नेतृत्वके गुण हैं और केवल एक परिवारको ही समूचे देशपर थोपना चाहते हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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