स्मरणहीनता रुपी दुर्गुणको दूर कैसे करें ? (भाग – १)


जबसे ‘उपासना’के माध्यमसे समष्टि सेवा आरम्भ की है तबसे मुझे एक बात ध्यानमें आई है कि आजके सामान्य व्यक्तिमें स्मरणहीनता रुपी दुर्गुणका प्रमाण बहुत अधिक बढ गया है ! पहले मुझे लगा कि यह ग्रामीण क्षेत्रोंमें अधिक है; क्योंकि वे अल्प शिक्षित या अशिक्षित होते हैं; किन्तु मेरे पास जब आश्रममें देश-विदेशके उच्च शिक्षित भी आने लगे और उनकी भीतर भी यह दुर्गुण तीव्र स्वरुपमें मैंने देखा तो मुझे अत्यधिक आश्चर्य हुआ ! किन्तु आश्चर्य करना तो उपाय नहीं है; इसलिए मैंने सोचा कि इस नूतन सामाजिक रोगका उपाय सार्वजानिक करना अब आवश्यक हो गया है इसलिए यह लेखमाला आरम्भ कर रही हूं ! जब मैंने उच्च शिक्षितोंमें भी यह समस्या देखा तो मैंने इस दुर्गुणके मूल कारणका स्थूल एवं सूक्ष्म समीक्षा की, उसके पश्चात जो तथ्य ध्यानमें आये वह आपके समक्ष रखनेका प्रयास इस लेखमालाके माध्यमसे करुंगी ! मैंने पाया कि कुछ साधकोंका आध्यत्मिक स्तर ५० % से अधिक है किन्तु तब भी उनमें स्मरणहीनताका दुर्गुण तीव्र प्रमाणमें है | मैंने देखा कि जिन्हें भी चाय या कॉफीका व्यसन है अर्थात वे इसका सेवन सामान्यसे अधिक प्रमाणमें करते हैं, उनमें यह दुर्गुण अधिक होता है ! चाय या कॉफी वस्तुत: एक तमोगुणी पेय है, इसका अयोग्य रीतिसे एवं अधिक प्रमाणमें सेवन करनेसे वृत्ति तामसिक होती है और इस कारण मन एवं बुद्धिके मध्य एक सूक्ष्म काला आवरण निर्माण होता है जो स्मरणहीनता हेतु उत्तरदायी होता है ! विशेषकर अधिक प्रमाणमें या प्रातःकाल बिना कुछ अल्पाहार किए यदि यह इसका सेवन किया जाए तो वह पित्तको बढाता है, जो भविष्यमें अनेक रोगोंको जन्म देता है ! ये दोनों पेय शरीरके जलको सोख लेता है ! ये दोनों पेयका सेवन आजसे तीन शतक पूर्व भारतमें कहीं नहीं किया जाता था !
     एक और बात मैंने देखी है कि ऐसे लोग जिनमें स्मरणहीनताका दुर्गुण होता है, वे अपने परिजन या मित्रद्वारा किया गया कोई भी अपमान भूल नहीं पाते हैं अर्थात तमोगुण अधिक होनेसे उनमें प्रतिशोधकी भावना अधिक होती है और इसलिए वे अपने जीवनके नकारात्मक प्रसोगोंको भूल नहीं सकते हैं एवं उनमें क्षमा करनेकी वृत्ति भी बहुत ही अल्प प्रमाणमें होता है ! वहीं जिससे उनका कल्याण हो एवं जो बातें स्मरणमें रखनी चाहिए, वह उन्हें ध्यानमें नहीं रहता है, विशेषकर वृत्ति तमोगुणी होनेसे उन्हें धर्म और अध्यात्मकी बातें स्मरण नहीं रहती हैं ! आगेके लेखोंमें मैं आपको स्मरणहीनता दूर करनेके स्थूल और सूक्ष्म उपाय भी बताउंगी ! किन्तु आजके लेखसे एक सीख तो आपको मिल ही गयी होगी कि तमोगुणी पेयका हमारे जीवनमें क्या दुष्प्रभाव होता है ! उपासनाके आश्रममें हम चाय या कॉफी पीनेको प्रोत्साहन नहीं देते हैं ! चाय व कॉफीके स्थानपर आप ऋतु अनुरूप अनेक पेय जो हमारे देशमें प्राचीन कालसे पिया जाता रहा है उसे पी सकते हैं ! इसके विषयमें भी आपको पूर्वके लेखोंमें बता चुकी हूं; अतः यदि इस दुर्गुणको दूर करना है तो स्वयंमें सुधार करें !


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