स्मरणहीनता रुपी दुर्गुणको दूर कैसे करें ? (भाग – २)
स्मरणहीनता यह दुर्गुणको दूर कैसे करें, यह आप स्वत: ही जान जाएंगे जब आप इस लेखमालाको पढेंगे; क्योंकि इसमें कारण बताया जाएगा तो यदि आप उस कारणका अभ्यास करेंगे तो आपकी बुद्धि निश्चित ही शुद्ध व तीक्ष्ण हो जाएगी ! हमारे आश्रममें कुछ उच्च शिक्षित आकर सेवा देते हैं; क्योंकि बुद्धिसे उन्हें सेवाका महत्त्व समझमें आ चुका होता है ! किन्तु हम धर्मप्रसार करते है तो स्वाभाविक है कि हमारी सेवा इसीसे अधिकतर सम्बन्धित होती है ! सेवा करते समय मैंने देखा कि इन उच्च शिक्षित साधकोंसे अनेक चूकें उनकी स्मरणहीनताके कारण होती है ! मैंने उन्हें सेवाके मध्य चूकरहित सेवा कैसे कर सकते हैं,, इसके कुछ दृष्टिकोण दिए एवं साथ ही कोई चूक हो जाए तो उसपर क्या उपाय योजना निकालनी चाहिए यह भी बताया ! किन्तु आश्चर्य ये लोग जो अपने व्यावहारिक जीवनमें बहुत सफल रहे हैं उन्हें अध्यात्मसे सरल दृष्टिकोण ध्यानमें ही नहीं रहते थे ! पहले तो एकके साथ मैंने ऐसा पाया उसके पास अनेक उच्च शिक्षितोंकी स्थिति ऐसी ही पाई ! तो मैं सोचमें पड गयी कि जिसमें सामान्य बातें स्मरण करनेकी शक्ति नहीं उन्होंने इतनी बडी-बडी पदवी कैसे प्राप्त कर ली ? तब मुझे ज्ञात हुआ कि कालांतरमें इनके आध्यत्मिक कष्टोंमें वृद्धि हुई और इस कारण भी मन एवं बुद्धिपर सूक्ष्म काला आवरण निर्माण होनेके कारण कष्ट बढ गया ! अर्थात आध्यत्मिक कष्ट होनेपर शरीर, मन व बुद्धि उसका एक बडा कार्यक्षेत्र होता है ! जैसे एक स्त्री थीं, उन्हें अवसाद था और वह उनके व्यावहारिक जीवनमें लगातार मिल रहे सफलताओंके कारण था, ऐसा उन्होंने बताया ! एक दूसरी स्त्री थीं, उन्हें कुछ वर्षोंसे श्वेत दाग (ल्यूकोडर्मा) होने लगे थे, यह कष्ट बढनेपर उनका यह दोष बढने लगा था ! एक और पुरुषको पितृदोषके कारण कुछ आर्थिक कष्ट था, उन्हें भी कुछ बताए हुए तथ्य ध्यानमें नहीं रहते थे ! संक्षेपमें जिन्हें आध्यत्मिक कष्ट अधिक होता है, उनके देह अनिष्ट शक्तियोंसे आवेशित हो जानेके कारण उनमें यह दुर्गुण बढ जाता है ! ऐसेमें योग्य साधना करना ही इस दोषको दूर करनेका उपाय है ! एवं साधना कैसे कर सकते हैं है यह हम आपको अपने लेखों एवं सत्संगोंमें बताते ही रहते हैं !
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