फरवरी १७, २०१९
पुलवामामें ‘सीआरपीएफ’ सैनिकोंपर आतंकी आक्रमणसे गुरुग्रामके कादीपुर स्थित ‘सीआरपीएफ’ शिविरके सैनिकोंमें आक्रोश है । रविवार, १७ फरवरीको ‘हिन्दुस्तान’ दलने सैनिकोंसे बात की तो उनकी भावनाएं नेत्रोंसे अश्रुके रूपमें बाहर आए । इस मध्य सैनिकोंने कहा कि आतंकियोंको जुवित न छोडें । शत्रुमें यदि शक्ति है तो वह सामनेसे प्रहार करे, छिपकर नहीं । वे चाहते हैं कि शासन सैनिकोंको आंतकियोंको जीवित न छोडनेकी छूट दे, ताकि वे इस कायरतापूर्ण कार्यवाहीका प्रखर उत्तर दे सकें । कार्यक्रममें जम्म-कश्मीरकी कार्यसे लौटे सैनिकोंने अपने अनुभव और कठिनाईयोंको साझा किया ।
सैनिकोंने पुलवामा आक्रमणमें हुतात्मा हुए अपने ४० मित्रोंको खोनेके पश्चात भी शत्रुसे लडनेकी हुंकार भरी । श्रद्धांजलि कार्यक्रममें ‘सीआरपीएफ’ सैनिकोंने कहा कि शत्रु सोचता है कि हमारा साहस टूट जाएगा तो वह भ्रममें है । सैनिक सत्येन्द्र सिंहने कि वह बदला लेनेको सज्ज हैं ।
इंस्पेक्टर पूरनमल यादवने जम्मू-कश्मीरमें अपनी तैनातीके अनुभवोंका उल्लेख करते हुए कहा कि हम सैनिक हैं और किसी भी स्थितिसे निपटनेमें सक्षम हैं; परन्तु घाटीमें हमारी कठिनाई केवल शत्रुकी नहीं है, वरन वहांपर सशस्त्र बलोंके पास अधिकार अल्प हैं । इससे भी कठिनाई आती है, अब समय आ गया है, जब ‘धारा – ३७०’पर शासन कोई निर्णय ले । उन्होंने कहा कि इस घटनासे ‘सीआरपीएफ’के सैनिकोंको जोश अल्प नहीं, वरन बढा है । अवसर मिलनेपर इसका प्रखर उत्तर दिया जाएगा ।
इंस्पेक्टर राजू यादवने कहा कि हमारे मनोबलमें कोई न्यूनता नहीं आई है, शासन श्रीलंकाकी भांति सैनिकोंकी सुरक्षाका विधान बनाए और सैनिकोंके विरुद्घ शस्त्र उठानेवालेको आतंकी घोषित करे । यादवने कहा कि हमारे लिए यह दुःखका समय है; परन्तु हमारा साहस सशक्त हैं । उन्होंने कहा कि उन्हें आशा है शासन इस आक्रमणका प्रखर उत्तर देनेका अवसर देगा ।
सीआरपीएफके वरिष्ठ सैनिक चंद्र किशोर सिंहने कहा कि घाटीमें सैनिक प्रतिदिन आतंकियोंको उनके अंजामतक पहुंचा रहे हैं । इसमें ४-५ आतंकी मारे जा रहे हैं । शत्रुने छिपकर उसीका बदला लिया है, जो कायरतापूर्ण है । सिंहने कहा कि आतंकियोंसे सीधा युद्ध आरम्भ होना चाहिए । ६-७ माहमें जम्मू-कश्मीरसे आतंकियोंका नाम मिट जाएगा ।
सीआरपीएफके उपसेनानायक रवि गिलने कहा कि सैनिक युद्धको सज्ज हैं । सैनिकोंको विशेष शक्ति व अधिकार दिए जाए । अभी हमें स्थानीय पुलिसका अनुगमन करना पडता है । हमारे हाथ बंधे हुए हैं, इससे भी शत्रुके विरुद्घ कार्यवाही करनेमें बाधा आती है । उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ प्रत्येक ओरसे सक्षम है । वे किसी भी समस्याका सामना कर सकती है । गिलने कहा कि उन्हें आशा है कि प्रधानमन्त्री-गृहमन्त्री इसे बारेमें सशक्त निर्णय लेंगे ।
इस कार्यक्रममें ‘ऑल इंडिया पैरा मिलिट्री पर्सनल एसोसिएशन’के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बीएसएफके पूर्व आईजी कंवर सिंह यादव व इसी एसोसिएशनके नेशनल सेक्रेटरी जनरल के.आर यादव भी उपस्थित रहे । दोनों पूर्व सैनिकोंने कहा कि सीआरपीएफके सैनिकोंको हुतात्माका सम्मान दिया जाना चाहिए ।
“लज्जाका विषय है, इन सब कार्योंके लिए भी शासनको कहना पडता है । यदि सब बातें कहनेकी ही आवश्यकता है तो शासकवर्ग अपनी बुद्धिसे क्या केवल बैठके, गठबन्धन और चुनाव विजयी होना जानते हैं ? पत्थरबाज पत्थर मारते हैं और सैनिकोंके शासनने हाथ बांधे हुए हैं ताकि वे चुनाव न हार जाए । शासकवर्ग इसपर कोई बहाना भी धहीं बंआ सकते हैं; क्योंकि एक बार नेताओंके पुत्र सेनामें जाने आरम्भ हुए तो सभी उपाययोजना स्वयं निकलेंगी !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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