अप्रैल ३, २०१९
उत्तर प्रदेशकी मुरादाबाद लोकसभा सीटसे सपा-बसपा गठबन्धनके उम्मीदवार एसटी हसनने विवादित वक्तव्य दिया है । एसटी हसनने ‘वंदे मातरम’को धर्मसे जोडते हुए कहा कि वह इस बारेमें धार्मिक गुरुसे विचार करेंगें; परन्तु उनका धर्म उन्हें आज्ञा नहीं देता तो वो भी ‘वंदे मातरम’के विरोधमें खडे हैं ।
संभल लोकसभासे चुनाव लड रहे डॉ. शफीकुर्रहमान बर्कने मुरादाबादमें मीडियाके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कहा था कि वह आज भी ‘वंदे मातरम’का विरोध करते हैं । उन्होंने गत शासनमें संसदमें चल रहे राष्ट्र गीतका विरोध करते हुए वाकआउट कर दिया था । इस प्रकरणमें जब एसटी हसनसे प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, ”इस बारेमें धार्मिक गुरुसे विचार करेंगे, यदि उनका धर्म उन्हें आज्ञा नहीं देता तो वो भी ‘वंदे मातरम’के विरोधमें खडे हैं ।”
“जो धर्म राष्ट्रके मध्य आए, उसे धर्म कहेंगें क्या ? भूमि, जो मांका स्वरूप है, जो अपनी सन्तानोंका पोषण करती है, जो कृतघ्न सन्तानें उन मांका वन्दन भी नहीं कर सकती है, तो उनका होने या न होनेका कोई लाभ नहीं ! और जो तथाकथित धर्म माताकी वन्दनासे रोकता हो, वह धर्म नहीं अधर्म है । सनातन धर्ममें वृक्ष, नदी, पहाड आदि सभीकी कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु वन्दन करते हैं; क्योंकि प्रत्येक वस्तु ब्राह्म स्वरूप है; परन्तु इस विकृत इस्लामिक मानसिकताने गत कुछ वर्षोंमें देशका वातावरण नष्ट कर दिया है । इस्लामकी दुहाई देकर मातृभूमिका अपमान करनेवाले कृतघ्न क्या इस पवित्र धराके योग्य हैं ?”- सम्पाद, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : वन इण्डिया
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