स्तरानुसार साधनासे लोगोंके दृष्टिकोण समझ आते हैं !


कुछ दिवस पूर्व एक व्यक्तिसे मेरी बातचीत हो रही थी ! वे ४० वर्षोंसे गायत्री साधना करते हैं और बाह्य रूपसे साधक होनेका पूर्ण दिखावा करते हैं | वे मुझसे कहने लगे, इतने सारे दुर्जनों, हिन्दू धर्मद्रोहियोंके रहते हुए, हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना कैसे होगी ? मैंने कहा, “सन्तवृन्द संकल्पसे ऐसा करेंगे”; क्योंकि ईश्वरका मारक तत्त्व कार्यरत रहेगा ! तो वे पूछने लगे, क्या आज भी संकल्पसे दुर्जनोंका नाश करनेवाले सन्त हैं ? मुझे लगा पूछूं कि ४० वर्षोंसे आप कौन सी साधना कर रहे थे कि आपको यह सामान्य सी आध्यात्मिक बातपर विश्वास नहीं है ?! तब ध्यानमें आया कि उनका आध्यात्मिक स्तर ४५ % है और इस स्तरपर ऐसी बातें करना या सोचना स्वाभाविक है ! मैंने अपने श्रीगुरुको कृतज्ञता व्यक्त की कि उन्होंने हमें स्तरानुसार साधना बताई है, इससे लोगोंके प्रति योग्य दृष्टिकोण रखनेमें सहायता मिलती है !



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