जनवरी १३, २०१९
दक्षिण कश्मीरके शोपियांमें मुठभेडमें मारे गए आतंकी जीनत और उसके मित्रकी शवयात्रामें सम्मिलित होने आ रहे आतंकी समर्थक तत्व हिंसक हो उठे । उन्होंने सुरक्षाबलोंपर पथराव, शस्त्र छीनने और उनके वाहन जलानेका प्रयास किया । इसके चलते झडपोंमें एक महिला व तीन सुरक्षाकर्मियों सहित १५ लोग चोटिल हुए हैं, जिनमें पांचको गोली लगी है । वहीं, स्वचालित शस्त्रोंसे परिपूर्ण आतंकियोंकी शवयात्रामें सम्मिलित होकर मारे गए साथियोंको नमन करते हुए हवामें गोलियां चलाईं !
शनिवार, १२ जनवरीको सुरक्षाबलोंने कठपोरा कुलगाममें अल-बदरके १२ लाख पुरस्कार राशिके आतंकी जीनतको और उसके मित्र फैसलको मार गिराया था । दोनों आतंकी सुगन चिलीपोरा शोपियांके रहनेवाले थे । जीनत कश्मीरमें सक्रिय ऐच्छिक आतंकियोंकी सूचीमें तीसरे क्रमांकपर था । २०१७ में सुरक्षाबलोंद्वारा जारी १२ अति ऐच्छिक आतंकियोंकी सूचीमें सम्मिलित १० आतंकी मारे जा चुके हैं । ऐसेमें अब दो ही आतंकी रियाज नायकू और जाकिर मूसा ही शेष हैं ।
रविवार प्रातः विभिन्न क्षेत्रोंसे लोग आतंकियों एकत्र होनेके लिए पहुंचने लगे । इस मध्य सेनापर पथराव करते हुए उनके शस्त्र छीननेका प्रयास किया । हिंसक भीडने सैन्य वाहनको कथित रूपसे आग लगानेका प्रयास भी किया । ऐसेमें वाहनको भीडसे बचानेके प्रयासमें चालकका नियन्त्रण खो बैठा और एक युवती चोटिल हो गई । इससे स्थिति और बिगड गई । लोगोंको शांत करानेके लिए लाठी चार्ज, आंसूगैस, पैलट गन और गोलियोंका भी आश्रय लेना पडा !
“क्या आतंकियोंका समर्थन देनेवाले मुफ्ती व अब्दुल्ला इस प्रकरणपर कुछ कहेंगें ? क्या सेनाको पत्थर मारनेवाले कलको आतंकी नहीं बनेंगें ? परन्तु विडम्बना है कि भारतीय प्रशासनने सेनाके हाथोंको बांधा हुआ है और सैनिक पत्थर खा रहे हैं ! यदि आजकी राजनीति विशुद्ध होती तो एक भी आतंकी समर्थक सेनापर पत्थर मारनेका दुस्साहस न करता ! पूर्वमें अनेक सैनिक पत्थरबाजोंके कारण अपने प्राण दे चुके हैं, क्या कोई राजनेता उस मृत सैनिकका उत्तरदायित्व लेकर अपने पुत्रको सीमापर भेजनेको सज्ज है ? यदि नहीं तो सैनिकोंके हाथ बांधनेका अधिकार क्या उन्हें होना चाहिए ? अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही इस तुष्टिकरणकी नीतिका अन्त कर सकती है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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