दिसम्बर २२, २०१८
बीडी पीनेसे देशको लगभग ८० सहस्र कोटि रुपयोंकी हानि हो रही है । ‘टोबैको कंट्रोल’में प्रकाशित शोधके अनुसार, बीडीसे स्वास्थ्यको हानि पहुंचती है और लोगोंको समयसे पूर्व मृत्युका सामना करना पडता है ।
‘आईएएनएस’के अनुसार, बीडीसे होने वाली हानि देशमें स्वास्थ्यपर होने वाले कुल व्ययका दो प्रतिशत है ! विवरणमें कहा गया है, “सीधे रूपसे रोगकी जांच, औषधि, चिकित्सकोंका शुल्क, चिकित्सालय, परिवहनपर होने वाला व्यय और परोक्ष व्ययमें सम्बन्धियोंका समायोजन व परिवारकी आयको होने वाली हानि इसमें सम्मिलित है ।
देशमें बीडी काफी प्रचलित है । बीडी पीने वाले १५ वर्षसे अधिक आयुके लोगोंकी संख्या ७.२ कोटि है । वहीं, शोधके अनुसार, बीडीसे २०१६-१७ में केवल ४.१७ अरब रुपयोंका राजस्व प्राप्त हुआ था । २०१७ के इस शोधमें स्वास्थ्य सेवा व्ययपर ‘राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण’ और ‘ग्लोबल एडल्ट टोबैको’ सर्वेक्षणके आंकडोंको सम्मिलित किया गया ।
विवरणके लेखक और केरलके कोच्चि स्थित पब्लिक पॉलिसी शोध संस्थानसे जुडे रिजो एम. जॉनने कहा है, “भारतमें पांचमेंसे लगभग एक परिवारको इस विनाशकारी व्ययका सामना करना पड रहा है । तम्बाकू और उससे शरीरको होने वाली हानिपर हो रहे व्ययके कारण लगभग १.५ कोटि लोग निर्धनताकी स्थितिसे गुजर रहे हैं ।”
“इस दुर्व्यसनसे राष्ट्रको इतनी हानि हो रही है, यह जानते हुए भी इसे न बन्द करना तो आत्महत्याके समान है ! बीडी, तम्बाकू, शराब आदि यह निरर्थक चीजे हैं, जिनपर राष्ट्र सहस्रों कोटि रुपयें व्यर्थ कर देता है ! निस्सन्देह इससे शासनको कर मिलता है, परन्तु हानि उससे कई गुणा अधिक है और युवाशक्ति भी नष्ट हो रही है ! शासन इसे राष्ट्रहितमें प्रतिबन्धित करें व राष्ट्रको व्यसन मुक्तकर एक नूतन दिशा दें !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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