सूख रहे वस्त्रोंको रात्रिमें छतपर ही सूखने हेतु न छोड दे!


आजकल अनेक लोग अपने घरमें सूख रहे वस्त्रोंको रात्रिमें छतपर ही सूखने हेतु छोड देते हैं । ऐसा करना अनुचित है; क्योंकि रात्रिके कालमें अनिष्ट शक्तियां विचरण करती हैं और उन्हें हमारे वस्त्रोंसे हमारा वलय ज्ञात हो जाता है, ऐसेमें वे हमपर आक्रमण कर देती हैं ! जैसे किसी वस्त्रमें काला आवरण उन्हें दिखाई दे तो उसे वे और काला कर देती हैं एवं यदि किसीसे नीला, पीला या श्वेत वलय दिखाई देता हो तो वे उसे अपनी ओर सोखकर, उसे काला कर देती हैं । अतः सूर्यास्तसे पूर्व वस्त्रोंको अपने घरके भीतर ले आएं या उसे सुखाना ही हो अर्थात वह गीला हो तो उसे छतके नीचे सुखाएं, खुले आकाशमें या आंगनमें न सुखाएं । ध्यान रहे, वस्त्रमें जो धूल, स्वेद आदिका रज-तम होता है, उसे दूर करने हेतु हम वस्त्र धोते हैं, यदि वह दूर हो जाए; किन्तु सूक्ष्मसे तम बढ जाए तो वह वस्त्र एक प्रकारसे अशुद्ध ही रह जायेगा !



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