धर्मधारा – विशुद्ध ज्ञान हेतु परम तप, सेवा और त्याग आवश्यक


सूक्ष्म इन्द्रियोंको जागृत करनेकी प्रक्रिया सीखने हेतु आनेवाले लोग जिज्ञासा दिखाते हैं; किन्तु उस हेतु योग्य पुरुषार्थ नहीं करना चाहते हैं | इस प्रक्रियाके प्रायोगिक पक्षको सीखने हेतु त्रैमासिक साप्ताहिक शिविर रखनेका नियोजन किया गया है तो कुछ लोग कहते हैं कि शिविरमें नहीं आ सकते हैं आप सबकुछ दूरभाष या whatsapp पर सीखानेका कुछ नियोजन करें ! यह तो वही बात हुई कि आधुनिक चिकित्सा शास्त्रको दूरभाष या whatsapp पर सीखना, जब शरीरके स्थूल ज्ञानके प्रायोगिक पक्षको सीखना आवश्यक है तो अध्यात्मकी सूक्ष्म शाखाको बिना प्रायोगिक पक्षके कैसे सीखा जा सकता है ? अध्यात्म सर्वश्रेष्ठ विद्या या ज्ञान है और उसकी सबसे श्रेष्ठ शाखा उसमें निहित सूक्ष्म ज्ञान है, उस हेतु आपको अपनी पात्रता सिद्ध करनी पडती है ! विशुद्ध ज्ञान हेतु परम तप, सेवा और त्याग करना पडता है, जो तीन माहमें सात दिन नहीं निकाल सकता, वह इस विद्याको पानेका अधिकारी कैसे हो सकता है ?



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