सूक्ष्म जगत – अग्निहोत्र मार्गदर्शनकी पूर्वसिद्धता आरम्भ करनेपर हुआ अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट !


कलसे अग्निहोत्र करने हेतु लोगोंके मार्गदर्शन हेतु सर्व पूर्वसिद्धता आरम्भ की है और मध्याह्न आते-आते मेरे मुखपर कई स्थानोंपर बडे-बडे लाल चकत्ते दिखाई देने लगे हैं और संध्या समय होते-होते वे लाल-लाल दानेमें परिवर्तित हो गए । मुझे तो ज्ञात भी नहीं था । किसी साधकके बतानेपर मेरा ध्यान गया, हां थोडी जलन अवश्य हो रही थी ।
     यह मेरे लिए या जो पाठक वर्ग है उनके लिए कोई नूतन बात नहीं है । जब भी कोई नूतन उपक्रम आरम्भ करती हूं तो सक्षम जगतकी अनिष्ट शक्तियां त्वरित अपनी प्रतिक्रिया मुझे दे देती हैं । उन्हें ज्ञात है कि ऐसा करनेसे सम्पूर्ण भारतके अनेक स्त्री, पुरुष व बच्चे ऐसा करने लगेंगे । इससे सबको शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ होगा । हम इस यज्ञसे उपजी विभूतिका भिन्न प्रयोग लोगोंको सिखाएंगे । उपासनाके आयुर्वेदिक चिकित्सालयमें इसपर प्रगत स्तरके शोध होंगे । आनेवाले आपातकालमें परमाणु युद्धमें लोग इसका उपयोगकर युद्धकी तीव्रताको न्यून करेंगे । साथ ही समाजको अग्निहोत्र हेतु सर्व सामग्री मिले इस निमित्त उपासनाकी गोशालासे देशी गायका घी, कण्डे (उपले) एवं अक्षत अर्थात अखण्ड चावल भी उपलब्ध करवानेका सोचा है !
अब जब उद्देश्य ऐसा हो तो आसुरी शक्तियोंको मुझसे क्यों न कष्ट हो ?
 चिन्ता न करें ! यह भी ठीक हो जाएगा । जब स्थूलयुद्ध होता है तो योद्धाओंको तो कष्ट होता ही है, वैसे ही सूक्ष्म युद्धके अंशमात्रमें स्थूल परिणाम तो दिखाई देते ही हैं, यह सब सहन करना हमारी साधना है । एक सप्ताहमें ठीक हो जाएगा ।  आपको मात्र बता रही हूं कि सूक्ष्म जगतकी आसुरी शक्तियां कितनी सतर्क रहती हैं ? मैं २०१६ में जब गोवा गई थी तो अपने श्रीगुरुसे पूछा था अनिष्ट शक्तियां हमें ही इतना कष्ट क्यों देती हैं ?, अन्य लोग भी ऐसा करते हैं तो उन्हें कष्ट क्यों नहीं होता है ? जबकि हमारा कार्य तो नगण्य है तो उन्होंने कहा, “चोर निर्धनके पास थोडे ही चोरीके लिए जाता है, वैसे ही अनिष्ट शक्तियों को ज्ञात है कि हमारे आरम्भ किए गए उपक्रमसे समाजको किस प्रकारसे लाभ होगा ?, इसलिए वे ऐसा करती हैं !
आज पुनः दैनिक वृत्तपत्रके लिए लेख लिखते समय संगणकमें टंकण (टाइपिंगमें) देरी हो रही थी तो पुन: ‘ऑनलाइन’ टंकण कर रही हूं ।
हाथकी वेदनामें भी कोई सुधार नहीं है, वेदनानाशक वटी (गोली), मुद्रा, आध्यात्मिक उपचार, मर्दन (मालिश) बिन्दुदाब (एक्यूप्रेशर) सब चल रहा है । आपातकालमें स्थूल और सूक्ष्म सम्बन्धी ज्ञान देनेका यह होता है परिणाम ! – (पू.) तनुजा ठाकुर, सम्पादक


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