सूक्ष्मसे हुई अनुभूतिकी स्थूलसे मिलने लगी प्रतीति !


 आपको बताया ही था कि उपासनाके मानपुर आश्रमके भूमिपूजनके समय मुझे सूक्ष्मसे परशुराम भगवानके आनेकी अनुभूति हुई थी और उन्होंने कहा था कि वे आश्रम बननेपर वे हमारे पास नीचे रहेंगे । हमारे आश्रमसे सात किलोमीटरपर एक पहाडपर जो विन्ध्याचलकी शृंखला है, उसपर सतयुगमें जमदग्नि ऋषिका आश्रम हुआ करता था, जो भगवान परशुरामकी जन्मस्थली भी है और अब वहां मात्र एक प्राचीन मन्दिर है । उस स्थानके महन्त परम पूज्य बद्रीनन्द महाराज हैं । उनकी आयु लोग बताते हैं कि १०३ वर्षके लगभग है और उस क्षेत्रका नाम जानापाव है । नामसे ही ज्ञात होता है कि वहां जाना कितना कठिन होगा ? किन्तु परम पूज्य बद्री बाबाके अथक प्रयासोंसे वह स्थान अब सुगम्य बन गया है ।
  बाबासे हमारा परिचय किसी स्थानीय व्यक्तिने दो वर्ष पूर्व कराया था और हम समय-समयपर उनसे आशीर्वाद लेने हेतु जाया करते थे; किन्तु जबसे हम इंदौर नगरसे यहां आ गए हैं, तबसे उनसे आत्मीयता बहुत बढ गई है । वे आश्रमके उद्घाटन समारोहमें भी आए थे और अब उनकी जब इच्छा होती है तो वे स्वयं भी आ जाते हैं । उनका स्नेह और विशेष आशीर्वाद देखकर हमें बहुत आनन्द होता है । वे आनेपर बहुत प्रेमसे महाप्रसाद ग्रहण करते हैं एवं विश्रान्ति भी करते हैं । उनके इस वर्तनसे मुझे परशुराम भगवानका वह कथन ध्यानमें आता है कि मैं तुम्हारे पास नीचे आकर रहूंगा । एक दिवस मैंने परम पूज्य बद्री बाबासे कहा, “आपके लिए एक कक्ष हम बनवाना चाहते हैं, जिससे आप यहीं रह सकते हैं ।” इसपर उन्होंने कुछ नहीं कहा अर्थात मौनसे हामी भरी है । बाबा हमारा भिन्न विषयोंपर मार्गदर्शन भी करते हैं । पहाडसे नीचे उनकी अपनी कुटिया है, जहां वे एकाकी रहते हैं । यद्यपि वहां उनके भक्त आते-जाते रहते हैं । हम सभीको उनकी सेवाकर बहुत आनन्द मिलता है । वे वैसे कहीं भी खाते-पीते नहीं हैं; किन्तु आश्रममें आकर हम उन्हें जो भी भावसे देते हैं वे सहर्ष ग्रहण करते हैं । इस प्रकार भगवान परशुरामकी जन्मस्थलीकी ६० वर्ष सातत्यसे सेवा करनवाले बद्री बाबाकी इस विशेष कृपा हेतु हम गुरुचरणोंमें व परशुराम भगवानके प्रति मनःपूर्वक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं । – (पू.) तनुजा ठाकुर


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