कई राज्योंमें हिन्दू अल्पसंख्यक, न्यायालयका आदेश, अल्पसंख्यककी परिभाषा निर्धारित करे शासन !!!


फरवरी ११, २०१९


अल्पसंख्यकोंकी परिभाषा निर्धारित करनेके लिए बीजेपी नेता अश्विनि उपाध्यायकी याचिकापर उच्चतम न्यायालयमें सुनवाई हुई । जिसके पश्चात न्यायालयने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोगको यह निर्देश दिया कि वह अल्पसंख्यककी परिभाषा निर्धारित करे ।

उपाध्यायने न्यायालयसे परिभाषा निर्धारित करनेकी मांग करते हुए कहा था कि उन्होंने आयोगको इस प्रकरणमें ज्ञापन दिया था । याचिकामें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियमकी ‘धारा-२(सी)’को रद्द करनेकी मांग की गई है । याचिकामें कहा गया है कि यह धारा मनमानी, अतार्किक और ‘अनुच्छेद १४, १५ और २१’का उल्लंघन करती है ।

इस धारामें केन्द्र सरकार को किसी भी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करनेके असीमित अधिकार दिए गए हैं । याचिकामें मांग की गई है कि केन्द्र शासनकी २३ अक्टूबर, १९९३ की उस अधिसूचनाको रद्द किया जाए, जिसमें ५ समुदायों मुसलमान, ईसाई, बौद्ध, सिख और पारसीको अल्पसंख्यक घोषित किया गया था ।

याचिकामें कहा गया है कि केन्द्र शासनको निर्देश दिया जाए कि वह अल्पसंख्यककी परिभाषा निर्धारित करे, ताकि संविधानके ‘अनुच्छेद २९-३०’में उन्हें अधिकार और संरक्षण मिले, जो वास्तवमें धार्मिक, भाषाई, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूपसे प्रभावशाली न हों ।

याचिकामें कहा गया है कि हिन्दू ब्यौरेके अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, जबकि पूर्वोत्तरके कई राज्यों और जम्मू-कश्मीरमें यही हिन्दू अल्पसंख्यक है । याचिकामें इस बातका तर्क दिया गया है कि हिन्दू समुदाय उन लाभोंसे वंचित है, जोकि इन राज्योंमें अल्पसंख्यक समुदायोंके लिए विद्यमान है ।

याचिकामें तर्क देते हुए मुस्लिमोंकी जनसंख्याका ब्यौरा भी दिया गया है । मुस्लिम जनसंख्याके ब्यौरे (याचिकानुसार) : लक्षद्वीपमें मुस्लिम जनसंख्या ९६.२०%, जम्मू-कश्मीरमें ६८.३०%, असम ३४.२०%, पश्चिम बंगाल २७.५%, केरल २६.६०%, उत्तर प्रदेश १९.३०% और बिहार १८% है । याचिकाकर्ताका कहना है कि इन सभी राज्योंमें मुस्लिम बहुसंख्यक होनेके पश्चात भी अल्पसंख्यक हैं और इन्हें शासकीय योजनाओंका लाभ मिल रहा है । जबकि जो वास्तवमें अल्पसंख्यक हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है ।

 

“कई राज्योंमें मुस्लिम बहुसंख्यक हो चुके हैं और अभी भी समस्त हिन्दू सुप्त हैं । जिन राज्योंमें मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, उनकी स्थिति किसीसे छिपी नहीं है, वहां हिन्दुओंकी दशा दयनीय हो चुकी है, उसके पश्चात भी धर्मान्धोंको अल्पसंख्यक बताकर समस्त शासकीय सुविधाओंका लाभ दिया जा रहा है ! क्या शासन इस देशको इस्लामिक राष्ट्र बननेकी प्रतिक्षा कर रहा है ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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