दीपावलीके ‘पटाखों’पर प्रतिबन्ध लगानेके लिए ‘आईआईटी’के वैज्ञानिक शोध आवश्यक नहीं, सर्वोच्च न्यायालयने ‘नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल’को बताया उचित   


२४ जुलाई, २०२१
           ‘एनजीटी’द्वारा ‘कोरोना’के चलते दूषित वायु गुणवक्ता सूचकाङ्कवाले क्षेत्रोंमें ‘पटाखों’की बिक्रीपर प्रतिबन्ध लगाया था । इस प्रकरणको लेकर ‘एनजीटी’के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट कराई गई । इसमें सर्वोच्च न्यायालयने याचिकाको अस्वीकृत करते हुए और ‘एनजीटी’के इस निर्णयको उचित बताते हुए शुक्रवार, २३ जुलाईको न्यायालयद्वारा भी इस प्रतिबन्धपर स्वीकृति दी । केवल दीपावलीको ही चिह्नित करके इस दिन ‘पटाखों’को प्रतिबन्धित करनेकी मांग बहुत समयसे चली आ रही है ।
         ‘पटाखे’ विक्रय करनेवालोंके पक्षकी ओरसे प्रकरणमें कुछ तथ्यात्मक प्रमाण प्रस्तुत किए गए । उनकी ओरसे प्रकरण लडनेवाले अधिवक्ताने ‘आईआईटी’की एक ‘रिपोर्ट’ प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार ‘पटाखे’ वायु प्रदूषणमें अपना योगदान देनेवाले शीर्ष १५ कारकोंकी सूचीमें भी नहीं आते हैं । इसपर न्यायाधीश खानविलकरने उत्तर देते हुए कहा, “क्या आपको यह समझनेके लिए ‘आईआईटी’की आवश्यकता है कि ‘पटाखे’ आपके स्वास्थ्यको प्रभावित करते हैं ? देहलीमें रहनेवाले किसी व्यक्तिसे पूछिए कि दीपावलीपर क्या होता है ?”
        ‘एनजीटी’का प्रतिबन्ध वर्तमान स्थितिको देखते हुए लगाया गया है । इसपर कोई स्पष्टीकरणकी आवश्यकता नहीं है । यदि इन क्षेत्रोंमें वायु गुणवक्तामें और गिरावट आती है तो निर्माणपर भी रोक लगाई जा सकती है ।
        सर्वोच्च न्यायालयका ‘पटाखों’पर प्रतिबन्धित करना जनहितमें है; परन्तु पर्यावरण व पञ्चतत्त्वोंको पुनः विशुद्ध करनेका सामर्थ्य निधर्मी लोकतन्त्र व्यवस्थाके पास नहीं है । इसका समाधान स्वतः ही हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : डू पॉलिटिक्स


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