सर्वोच्च न्यायालयसे बंगाल शासनको झटका, विधान निरस्त कर कहा, “समानान्तर शासन स्थापित करनेका प्रयास अस्वीकार्य”


०६ मई, २०२१
    सर्वोच्च न्यायालयने बंगाल शासनद्वारा गठित ‘वेस्ट बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्रीज रेगुलेशन एक्ट’-२०१७को निरस्त कर दिया है । न्यायाधीश चन्द्रचूडके नेतृत्वमें न्यायधीशोंने मंगलवार, ४ मई २०२१ को यह निर्णय दिया । बंगाल शासनने यह विधान केन्द्रके ‘रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेन्ट एक्ट’-२०१६के स्थानपर गठित किया था । सर्वोच्च न्यायालयने कहा कि समानान्तर शासन स्थापित करनेका यह प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता । इसे न्यायालयने केन्द्रीय विधानपर राज्यद्वारा अतिक्रमण माना ।
     भारत शासनद्वारा बनाए विधानके स्थानपर राज्यका अपना विधान बनाना, संविधानकी अवहेलना तो है ही, स्वयंको शेष भारतसे पृथक दिखानेका प्रयास भी है, इसीसे ममता बनर्जीके घातक मन्तव्योंका अनुमान लगाया जा सकता है । ऐसे अहंकारी और भारत विरोधी शासकोंको दण्डित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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