स्वप्नमें प्रतिदिन होती थीं वार्ता; इसलिए विश्वास था कि ‘पिता’ आकर बचा लेंगे !


जुलाई ३, २०१८

बुराडीके सन्त नगरमें रविवारको एक घरमें मिले ११ शवोंके प्रकरणमें पुलिस जांचमें इसे अन्धविश्वासको लेकरकी गई आत्महत्या मानकर चल रही है । सभी शवोंकी शवपरीक्षण विवरण आ चुका है और उसमें मृत्युका कारण फांसी लगना बताया गया है और यह बात भी स्पष्ट हो चुकी है कि किसी भी शवपर बलपूर्वक मारनेके साक्ष्य नहीं हैं । इतना ही नहीं घरमें मिली दो पुस्तकोंपर लिखी बातोंसे भी संकेत मिल रहे हैं कि यह कुटुम्ब किसी विशेष पूजा-पद्धतिका अनुसरण करता था; यद्यपि मृतक कुटुम्बके सम्बन्धी इसे सामूहिक आत्महत्या नहीं, वरन हत्याकाण्ड बता रहे हैं । जब पुलिस घटनास्थलपर पहुंची तो सभी मृतकोंके हाथ पीछे बन्धे थे । आंखपर, मुखपर पट्टी बन्धी हुई थी और कानोंमें रूई थी । एक वृद्ध महिला नारायण देवीका (७७) शव जमीनपर पाया गया था ।

पुलिसको घरमें से नारायण देवी (७७), उनकी पुत्री प्रतिभा (५७), प्रतिभाके दो पुत्र भावनेश भाटिया (५०) और ललित भाटिया (४५), बेटी प्रियंका (३३), भावनेशकी पत्नी सविता (४८) और उनके तीन बच्चे मीनू (२३), निधि (२५) और ध्रुव (१५), ललित भाटियाकी पत्नी टीना (४२) और उनका १५ वर्षका पुत्र शिवमका शव मिला । पुलिसने बताया कि प्रियंकाकी इस वर्षके अन्तमें विवाह होना था, गत माह ही उसका अनुबन्ध (सगाई) हुई था ।

पुलिस सूत्र बताते हैं कि घरमें ललित भाटियाके कहनेपर ही सबकुछ होता था । वह कुटुम्बमें सबसे शक्तिशाली था, जैसा बोलता, पूरा कुटुम्ब वैसा ही करता था । पुस्तकमें कई जगह यह लिखा हुआ है कि ललितकी उसके दिवन्गत पिता गोपालदास भाटियासे स्वप्नमें बातें होती थीं और ललित प्रत्येक छोटे-बडे निर्णयमें अपने पितासे परामर्श करता था । पुस्तकमें लिखी बातोंसे पता चलता है कि गोपालदास ही स्वप्नमें आकर बताते थे कि कौन सा कार्य करना चाहिए और कौन सा नहीं या कार्य कब और किस तरह से करना चाहिए ? गोपालदासकी १० वर्ष पूर्व मृत्यु हुई थी ।

ललितका अपने पितासे इस काल्पनिक संवादका बहुत गहरा प्रभाव था । ललितने पुस्तकमें लिखा था, ‘अन्तिम समयमें अन्तिम इच्छाकी पूर्तिके समय, आकाश हिलेगा, धरती काम्पेगी, उस समय तुम भयभीत मत होना, मन्त्रोंका जाप बढा देना, मैं आकर तुम्हें उतार लूंगा, औरोंको भी उतारनेमें सहायता करुंगा !’

पुलिसके सूत्र बताते हैं कि इस तरह पिताका आश्रय मिलनेका विश्वास दिलाकर ललित और पूरा कुटुम्ब फांसीपर लटक गया । पुस्तकके पृष्ठपर ललितने लिखा था कि उसे पिताका सन्देश मिला है कि एक विशेष पूजा-पद्धतिसे वह मोक्षके दर्शन करके वापस धरतीपर लौट आएंगे ! पुलिसने कुटुम्ब और निकटके लोगोंसे सूचना एकत्रित करनेके बाद बताया कि ललित बहुत ही धार्मिक प्रवृतिका था और वह मौन रहता था । वह सम्पूर्ण घटनाक्रम एक पुस्तकमें लिखता था । इतना ही नहीं, जब वह मौनमें रहता था तो दुकानपर ग्राहकोंसे लिखकर ही संवाद करता था । बताते हैं कि ललित २०१५ से लिख रहा था । पुलिस ने बताया कि अन्धविश्वासमें पडकर सम्पूर्ण कुटुम्ब एक ऐसा खेल खेल रहा था, जिसमें उन्हें मृत्युका भान नहीं था, बल्कि यह सब मोक्षकी प्राप्तिकी एक प्रक्रिया मात्र थी ! यह प्रक्रिया आरम्भ करनेसे पूर्व कुटुम्बने २० रोटियां बाहरसे मंगाई थीं ।

पुलिसको आशंका है कि सन्दिग्ध परिस्थितियोंमें मृत मिला भाटिया कुटुम्ब ‘साझा मनोविकृति’से ग्रस्त हो सकता है । पीडितोंके निकटवर्ती लोगोंका कहना है कि इस कुटुम्बके सदस्य काफी सहायक थे; यद्यपि वे अपने कुटुम्बके सदस्योंके बारेमें कभी भी वार्ता नहीं करते थे । पुलिसने बताया कि ललित भाटियाको अपने मृतक पितासे बात करनेका भ्रम था । उसके विश्वासको कुटुम्बके अन्य सदस्योंने समर्थन भी दिया था ।

स्रोत : जी न्यूज



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