स्वस्थ रहने हेतु जलसे सम्बन्धित कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्योंका अवश्य करें पालन (भाग-इ)


स्वस्थ रहने हेतु उष्ण (गर्म) जलका सेवन कब एवं क्यों करना चाहिए ?

ठण्डे पानीके स्थानपर उष्ण अर्थात गर्म पानीके अधिक लाभ हैं । अनेक शोधोंसे ज्ञात हुआ है कि उष्ण जल पीनेसे        शरीरके भीतर एकत्रित विषैले तत्त्व बाहर आ जाते हैं । इसके अन्य लाभ इस प्रकार हैं –

* इससे मलावरोध (कब्ज) ठीक हो जाता है ।

* पाचन क्रियामें भी सहायता मिलती है, जैसे यदि आपको भोजनके समय जल पीनेकी इच्छा हो तो उष्ण जलके कुछ     घूंट पी सकते हैं । इससे जठराग्नि बुझती नहीं है और यह जल पाचन क्रियामें भी सहायक होता है ।

* गुनगुने जलमें नींबू और मधु डालकर प्रातः पीनेसे भार कम होता है; किन्तु यह प्रक्रिया अधिक समय नहीं करना         चाहिए, इससे कुछ लोगोंको अस्थियोंमें समस्या निर्मित हो   सकती है ।

* उष्ण जलमें काली मिर्च, ‘नमक’ और नींबूका रस डालकर पीनेसे भूख बढती है ।

* उष्ण जलसे सेवनसे त्वचाके मुंहासे घट जाते हैं और त्वचा स्निग्ध हो जाती है ।

* उष्ण जलके सेवनसे रक्त सञ्चालन भी सुचारू रूपसे होने लगता है ।

* कफ प्रधान लोगोंको उष्ण जलका प्रयोग करना चाहिए । इससे कफ और ‘सर्दी’ दोनों ही समस्याएं दूर होती हैं ।    पित्त प्रधान लोगोंको उष्ण जलका उपयोग अधिक नहीं करना चाहिए ।



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