‘तालिबान’की प्रशंसा करनेवाले तमाल भट्टाचार्यके विरुद्ध अब बंगाल गृहमन्त्रालयने स्वीकार किया परिवाद


३० अगस्त, २०२१
        बंगाल राज्यके गृहमन्त्रालयने कोलकाताके सूरज सिंहके अनुरोधपर अब तमाल भट्टाचार्यके विरुद्ध परिवाद स्वीकृत कर लिया है । प्रकरण देशद्रोहकी धाराओंके अन्तर्गत प्रविष्ट हुआ है । तमाल भट्टाचार्य वही व्यक्ति है, जो कुछ दिवस पूर्व ही अफगानसे बचाकर भारत लाया गया था; परन्तु उसने यहां पहुंचते ही ‘तालिबान’का गुणगान करना आरम्भ कर दिया था । अपने परिवादमें सूरजने गृहमन्त्रालयसे अनुरोध किया है कि उत्तरी दमदम क्षेत्रके निमटा निवासी ३४ वर्षीय तमाल भट्टाचार्यको भारतीय प्रशासनने वहां चल रही अशान्तिके कारण अफगानिस्तानसे बाहर निकाला था । तमाल वहां एक विद्यालयमें शिक्षकके रूपमें कार्यरत था; परन्तु भारत आनेके पश्चात उसकी टिप्पणी परिवर्तित हो गई । सूरजके अनुसार, ऐसे कठिन समयमें जहां सम्पूर्ण विश्व आतङ्कवादसे निपटनेके लिए सङ्घर्ष कर रहा है और वहीं तमाल भट्टाचार्य जैसे लोग घातक जिहादी आतङ्कवादी समूहको ऐसे चित्रित कर रहे हैं, मानो वह दयालु और सहायता करनेवाले हो । ‘तालिबान’ आतङ्कियोंकी उदारताके विषयमें भट्टाचार्यने टिप्पणी करते हुए कहा था की कि “मैंने सोचा था कि ‘तालिबान’ हमें पकडकर मार डालेगा; परन्तु उन्होंने हमें सुरक्षित विद्यालयसे बाहर निकाला और आश्वासन दिया कि भयभीत होनेकी कोई बात नहीं है । उन्होंने जो कहा उस वचनको निभाया भी ।” तमालके इस विवादास्पद वक्तव्यको कट्टरपन्थी इस्लामवादियोंका भारी समर्थन मिला, जो ‘तालिबान’द्वारा किए जा रहे अत्याचारोंको उचित बतानेके अवसर खोज रहे थे । सूरजने गृहमन्त्रालयसे अनुरोध किया है कि आधिकारिक गुप्त अधिनियम १९२३ और भारतीय दण्ड संहिताकी ‘धारा-१२१’ व ‘धारा-१२४ ए’के अन्तर्गत तमालके विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट किया जाए ।
    जिस राष्ट्रमें स्वयंके नागरिक अन्य राष्ट्रोंमें विस्थापित होने हेतु युद्ध स्तरपर प्रयत्नशील हो, वहांकी प्रशंसा राष्ट्रवादियोंके मन अवश्य ही संशय उत्पन्न करती है । ऐसे अवसरवादी व्यक्ति कभी भी राष्ट्रके लिए सहायक नहीं; अपितु सदा घातक ही सिद्ध होते हैं । ऐसे व्यक्ति कठोर दण्डके ही‌ पात्र हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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