मंसूर अलीपर किया गया दो लाख रुपएका अर्थदण्ड, मुखावरणका उसने उडाया था परिहास


३० अप्रैल, २०२१
         मद्रासके उच्च न्यायालयने मंसूर अलीको दो लाख रुपए अर्थदण्ड देनेके लिए आदेश दिया है । मंसूरने ‘कोरोना वैक्सीन’को लेकर भ्रान्ति फैलानेका कार्य किया था, जिस कारण उसकी बहुत आलोचना हुई थी । इससे पूर्व भी उसपर इस प्रकारके आरोप थे ।
      एक अन्य अभिनेताकी ‘कोरोना’ महामारीसे मृत्यु हो जानेपर, मंसूरने ‘वैक्सीन’का नाम जोडकर, प्रशासनपर उसकी हत्याका प्रकरण जोडा था । उसने कहा था कि ‘वैक्सीन’ लेनेसे पूर्व वह अभिनेता पूर्णतया स्वस्थ था; किन्तु प्रशासनने उसे ‘वैक्सीन’ देकर, उसकी हत्या कर दी ।  मंसूरने प्रशासनके दिशानिर्देशोंको मूर्खतापूर्ण बताया और कहा कि वह भिखारियोंके साथ मिलकर खाता-पीता रहा; किन्तु उसे ‘कोरोना’ नहीं हुआ । ‘ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशनद्वारा प्रकरण प्रविष्ट होनेके तुरन्त पश्चात ही उसे उच्च न्यायालयसे प्रतिभूति भी मिल गई । उच्च न्यायालयके समक्ष उसने अपनी याचिकामें कहा कि एक चिकित्सालयके द्वारपर भावुक होकर उसने ऐसा व्यक्तव्य दिया था और किसीको ठेस पहुंचानेका कोई उद्देश्य नहीं था ।
     जिस प्रकार ऐसे नट अपने दूषित क्रियाकलापोंद्वारा जनसाधारणको भडकानेका कार्य करनेसे नहीं चूकते और लोगोंमें भय उत्पन्नकर देशके अस्तित्वको सङ्कटमें डालनेका प्रयास करते हैं; किन्तु स्वयंपर सङ्कट आनेपर, भावनाओंमें बहकर वक्तव्य देनेका विलाप करते हुए अपना बचाव करते हैं । शासनद्वारा ऐसे नटोंको भी सामान्य अपराधियोंकी भांति बन्दीगृहका मार्ग दिखाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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