सूअरोंकी बलिसे प्रदूषण, मानसिक शान्ति भङ्ग, कट्टू नायक्कर समुदायके हिन्दुओंकी परम्पराओंके विरुद्ध हुए मुसलमान
३१ जुलाई, २०२१
‘डीएमके’के सत्तामें आनेके पश्चात तमिलनाडुमें हिन्दुओंको अपने त्योहार, परम्पराओंको निभानेके अधिकारोंसे वंचित होना पड रहा है । प्रकरण पुदुकोट्टई जनपदका है । बताया जा रहा है कि तमिलनाडुके पुदुकोट्टई जनपदमें मुसलमानोंने हिन्दुओंद्वारा सूअरोंकी बलि देनेकी परम्पराका कठोर विरोध करते हुए इसपर रोक लगानेकी मांग की है ।
हिन्दू ‘पोस्ट’के विवरणके अनुसार, यह प्रकरण एक बडे विवादको जन्म दे सकता है । ‘मीडिया रिपोर्ट’के अनुसार, तमिलनाडुके पुदुकोट्टई जनपदके अरंथंगी क्षेत्रके मुसलमानोंने हिन्दुओंको अपने अनुष्ठानोंमें सूअरोंको मारनेको अपराध बताया है । उन्होंने हिन्दुओंको इस प्रकारके अनुष्ठान करनेसे रोकनेके लिए जनपद प्रशासनसे परिवाद भी प्रविष्ट कराया है ।
नायक्कर समुदाय मदुरै वीरन स्वामीकी पूजाके रूपमें सूअरोंकी बलि देता है, जो कि उनके कुल देवता हैं । वे सामान्यतः क्षेत्रीय कार्यालय और अरंथंगीमें आंगनवाडीके पास सूअरोंकी बलि देते हैं ।
हास्यस्पद है कि गोहत्या करनेवाले अब अन्य बलिपर पर्यावयणकी बातोंका ढोंग कर रहे हैं । यह सब ‘डीएमके’ सदृश हिन्दूद्रोही दलोंके समर्थनका ही परिणाम है । ऐसे विषकारी लोग व दल, दोनों ही भारतके लिए अहितकर हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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