फरवरी २६, २०१९
कठुआके शासकीय महाविद्यालयमें सोमवार, २५ फरवरीको तनाव उत्पन्न हो गया, छात्रोंने प्रदर्शन किया । छात्रोंने आरोप लगाया कि कुछ उपद्रवियोंने एक कक्षाके भीतर पुलवामा आक्रमणसे सम्बन्धित “भडकानेवाले शब्द” लिखे थे । “पुलवामा अटैक याद है न ?” रविवारके अवकाशके पश्चात जब महाविद्यालय सोमवारको खुला तो ‘नॉन-मेडिकल’ विभागके कक्षा क्रमांक- १८ के भीतर एक ‘डेस्क’पर नीली स्याहीसे लिखा हुआ पाया गया था । क्रोधित छात्र अपनी कक्षाओंसे बाहर आ गए और प्रदर्शन करने लगे ।
कठुआ एसएसपी श्रीधर पाटिलने कहा कि पुलिस भी वहांपर पहुंची और छात्रोंको उनके अध्ययन कक्षमें लौटनेके लिए शांत किया । तदोपरान्त, महाविद्यालय प्रशासनने इस प्रकरणमें आंतरिक जांच करानेका आश्वासन दिया, पुलिसने भी उपद्रवियोंका अभिज्ञान करनेके लिए पूछताछ आरम्भ कर दी है । इस मध्य, कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियोंने कहा कि “पुलवामा आक्रमण याद है न” लिखनेका सकारात्मक अर्थ भी है; क्योंकि यह लोगोंको हुतात्मा सीआरपीएफ कर्मियोंको स्मरण करनेके लिए कहता है । इसके अतिरिक्त, एक ‘डेस्क’पर “सर्जिकल स्ट्राइक याद है न” भी लिखा गया था । सोमवारको प्रातःकाल ही विरोध आरम्भ हो गया, उन्होंने कहा कि पुलिस भी देख रही थी कि उन दो घंटोंके मध्य क्या हुआ था ?
“शासन समर्थित महाविद्यालयोंमें शासन विरोधी आतंकी पल रहे हैं, जो हमारे ही समक्ष हमें चिढा रहे हैं और ऐसा नहीं है कि पुलवामामें भारतीय जवान हुतात्मा हुए तो शेष दुःखी है । आतंकका प्रशिक्षण लिए और इस्लामिक शिक्षाको धारण किया प्रत्येक व्यक्ति इससे प्रसन्न है, चाहे वह छात्र हो अथवा कोई और हो । महबूबा मुफ्ती इन्हीं बच्चोंको अपना बताकर इनका समर्थन करनेकी बातें करती हैं ! इससे ज्ञात होता है कि किसप्रकार आतंक कश्मीरके मूलतक फैल चुका है, जिसे स्वच्छ करना अत्यावश्यक हो गया है । यदि यह शीघ्र ही नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब कश्मीरके प्रत्येक घरसे इस्लामिक ध्वनि गूंजेगी, जो दीमक बनकर भारतके अन्य स्थानोंको भी निगलेगी । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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