पाकिस्तानमें कट्टरपन्थियोंने चिकित्सालयमें घुसकर किया परिचारिकाओंपर (नर्सोंपर) आक्रमण
१२ अप्रैल, २०२१
इमरान खानके नूतन पाकिस्तानका, जो अल्पसङ्ख्यकोंके लिए नरक बन चुका है, प्रतिदिन अल्पसङ्ख्कोंको लक्ष्य बनाया जा रहा है, नूतन प्रकरण फैसलाबादसे सामने आया है, जहांपर ईशनिन्दाके आरोपमें दो परिचारिकाओंके साथ मारपीट की गई । बताया जा रहा है कि उन्होंने एक ‘अलमारी’के ऊपर लगे एक पवित्र नाम-पत्रको हटा दिया था, इसे लेकर स्थानीय पुलिस ‘स्टेशन’में प्रकरण भी प्रविष्ट किया गया था; परन्तु इस समय चिकित्सालयमें कट्टरपन्थियोंकी भीड एकत्र हो गई । लोगोंने वहांपर अधिकार कर लिया था । इस मध्य भीतर खडे पुलिसके वाहनपर भी आक्रमण किया, जिससे वे आरोपी परिचारिकाओंको स्वयं पकडकर दण्ड दे सकें । यद्यपि, पुलिसने किसी प्रकार उन्हें भीडसे बचाया ।
पाकिस्तान वहां रह गए गिने-चुने अल्पसङ्ख्यकोंके लिए असुरक्षित होता जा रहा है । पाकिस्तानी ‘तानाशाह’ ‘जिया-उल-हक’के शासनकालमें बनाया गया ईशनिन्दा विधान, एक ओर शासनको कट्टरपन्थी जिहादियोंके विरुद्ध कार्यवाही न करनेका ‘बहाना’ देता है, वहीं दूसरी ओर कट्टरपन्थी जिहादियोंको वहां रह रहे अल्पसङ्ख्यक हिन्दुओं एवं ईसाइयोंपर अत्याचार एवं हिंसा करनेके लिए बल प्रदान करता है । भारत एवं अन्य देशोंको चाहिए कि अन्तरराष्ट्रीय मंचों’पर जिस प्रकार आतङ्कवादपर आर्थिक सहायता रुकवाई है, वैसे ही अल्पसङ्ख्यकोंके विरुद्ध हो रहे अत्याचार एवं हिंसापर भी दबाव बनाया जाए, तभी वहां कुछ स्थिति सुधरेगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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