यहां कलियुगमें भी मिलता है सत्यका प्रमाण, लोटेमें दर्शन देती हैं मां ज्वाला !


नवम्बर १२, २०१८

 

विश्व विख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी मन्दिरमें कलियुगमें भी सत्यका प्रमाण सिद्ध होता है । देवालयमें लोटेमें भी ज्वाला मांके दर्शन होते हैं । पानी व दूधको लौटेमें डाल कर ज्वालाके मुखमें लगाते हैं तो ज्वाला मां लौटेमें दर्शन देती हैं ! पुजारी अविनेदर शर्माने बताया कि ज्वालामुखी मंदिरमें आज भी लोटेमें ज्वाला मांके दर्शन करवाए जाते हैं । कलियुगमें यह सत्यका प्रमाण सिद्ध होता है । ‘जले ज्वाला, स्थले ज्वाला, ज्वाला आकाश मंडले, तरलोए व्यापनी ज्वालामुखी देव्यैः नम:’, यह जो मंत्र है आजके युगमें बडा ही यथार्थ है । ज्वालामुखी मंदिरमें आकर भक्त जल व दूधको लोटेमें डालकर मांको भोग लगाते हैं और लोटेमें ज्वाला मांके दर्शन होते हैं । ज्वालामुखीके १४० किलोमीटर दूर स्थित श्रीनयनादेवी शक्तिपीठ मंदिरमें आकाश मंडलद्वारा ज्योतियां जाती हैं और अपने सभी भक्तोंको दर्शन देती हैं ।

श्रीनयनादेवी मंदिरके ऊपर त्रिशूल स्थित है । ये ज्योतियां उसके ऊपर जाकर मां नयनादेवीके नेत्रको स्पर्श करती हैं, उसके पश्चात् मंदिरमें स्थित पीपलके पेडके पत्ते-पत्तेपर ज्योतियोंके दर्शन होते हैं । उस मध्य मंदिरमें इतनी हवा होती है कि वहां कोई व्यक्ति खडा नहीं हो सकता है और मंदिरमें उपस्थित सभी भक्तोंने जो पुष्प व मिष्ठान्न लिया होता है, उन सबपर ज्योतियोंके दर्शन होते हैं । जिस दिवस ज्योतियां श्रीनयनादेवी मंदिर जाती हैं, उस दिवस मौसम वर्षा वाला व खराब होता है । उस दिवस ज्वालामुखी मंदिरमें ज्योतियां शान्त हो जाती हैं और ज्वाला मांकी मुख्य ज्योतिके ही दर्शन होते हैं । इसका कोई दिन निश्चित नहीं होता है, यह वर्षमें २-४ बार जाती है । यह दृश्य एक या दो मिनटका होता है ।

इसके पीछे शास्त्रोंमें कथा है कि नयनादेवी माता महिषासुर मर्दनीके रूप स्थापित हैं । यह अपने स्थानसे उठ नहीं सकतीं । यदि यह उठेंगी तो वो जो राक्षस, जिसके हड्डियोंके ढांचेपर मां नयनाने अपना आसन रखा हुआ है, वो उठकर पुनः मांसे युद्ध करनेको आतुर हो जाएगा । इस कारण महामाई वहांसे नहीं उठती हैं ।

 

“सनातन धर्मके देवों- दानवों व शक्तियोंके यही रहस्य, जो समय-समयपर सत्यके रूपमें उद्घाटित होते रहते हैं, इसकी विशालता, महानताको सिद्ध करते हैं । अन्य पन्थ आदि केवल सतही बातें कर मानवको भटकानेका कार्य मात्र करते हैं, परन्तु अन्तिम सत्य केवल हिन्दू धर्मही उजागर करता है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : पंजाब केसरी



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