भारत-विरोधी वित्त पोषणको ‘द प्रिंट’ने चूकसे छापा, कुछ समय उपरान्त हटाया


१३ फरवरी, २०२१
     इस ‘रिपोर्ट’में जॉर्ज सोरोस की ‘एंटी-इंडिया फंडिंग’ और इस धनसे लाभ उठानेवाले ‘मीडिया’ संस्थानोंके विषयमें बतानेवाले ‘वीडियो’का विस्तारसे वर्णन किया गया ।
    बृहस्पतिवार, ११ फरवरीको ‘ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब’ने एक ‘वायरल वीडियो’को हटा दिया । इसमें ‘द स्ट्रिंग’ नामके एक ‘यूट्यूब चैनल’ने कहा था कि उसने जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशियोंकी भारत-विरोधी षड्यन्त्रोंके लिए धन और उस धनसे लाभ अर्जित करनेवालोंको सामने रखा था ।
इसके साथ ही, इस ‘वीडियो’में ग्रेटा थनबर्गद्वारा सार्वजनिक की गई ‘टूलकिट’के सम्बन्ध ‘मजहबी फैक्ट चेकर वेबसाइट’ ‘ऑल्ट न्यूज’से लेकर बरखा दत्त जैसे पत्रकारोंसे जुडे भी बताए थे । ‘स्ट्रिंग’ने इस ‘वीडियो’के पश्चात प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और गृहमन्त्री अमित शाहसे अपनी सुरक्षाकी भी मांग की थी ।
इसके ठीक एक दिन पश्चात अब, शेखर गुप्तके ‘वेब पोर्टल द प्रिंट’ने बिना किसी विशेष कारणके जॉर्ज सोरोस और ग्रेटावाली ‘टूलकिट’के मीडिया संस्थानोंसे सम्बन्धको उजागर करनेवाले ‘वीडियो’को हटाए जानेके सम्बन्धमें प्रकाशित की गई एक ‘रिपोर्ट’को अपने जालस्थलसे हटा दिया है ।
       ‘सोशल मीडिया’के जितने भी मंच हैं, वह सभी अपने व्यावसायिक हितोंको ध्यानमें रखकर कार्य करते हैं । न ही उन्हे किसी भी देशके हितोंकी चिन्ता और न ही लोगोंके हितोंकी ! विगतके कुछ प्रसंगोंमें ‘सोशल मीडिया’ और देशमें केन्द्रके शासनमें भी ‘ठनी’ हुई है और ‘सोशल मीडिया’ प्रयासमें है कि उनके परामर्शको अनदेखाकर कार्य करें; परन्तु शासनको चाहिए कि वह सुनिश्चित करे कि यदि उन्हें भारतमें कार्य करना है तो किसी भी प्रसंगमें देशहित पहले है और उनके व्यावसायिक हित देशहितके उपरान्त हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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