‘द प्रिंट’के लेखमें मार्गके मध्य ‘नमाज’पर बचाव, मन्दिरोंमें ‘नमाज’पर गर्व, सऊदीमें है रोक, क्या ‘मस्जिदों’में हवन होगा ?


१ नवम्बर, २०२१
     ‘द प्रिंट’ एक मुसलमान पक्षीय समाचारवाहिनी है । वे बता रहे हैं कि ‘नमाज’ हिन्दू विरोधी कृत्य नहीं है । मार्ग रोककर मध्यमें ‘नमाज’ पढना तर्कपूर्ण है । कथित विद्वान प्रो. हिलाल अहमद अपने लेखमें गुरुग्राममें मार्गके मध्य पढी जा रही ‘नमाज’में बाधा होनेसे क्षुब्ध हैं । मार्गमें वाहनोंका आवागमन रोकना, उन्हें तर्कसङ्गत लगता है । ये लोग रेलयानोंमें, चिकित्सालयोंमें, व्यस्त गलियोंमें मार्गके मध्य यहांतककी हिन्दू मन्दिरोंमें भी ‘नमाज’ पढ चुके हैं, जिसे ये अपनी उपलब्धि मानते हैं । लेखमें वे लिखते हैं कि मुसलमानोंकी जनसङ्ख्यामें वृद्धि होनेसे उन्हें सार्वजनिक स्थानोंपर ‘नमाज’की अनुमति मिलनी चाहिए । भारतमें ३ लाखसे अधिक ‘मस्जिदें’ हैं, तो क्या यह सङ्ख्या न्यून है ? ये लोग दिनमें ५ बार ‘लाउड स्पीकर’से कोलाहल भी करते हैं ।
       इस लेखमें राममन्दिरपर कुछ अनर्गल लिखा है । बदरीनाथ धाममें ‘नमाज’का समर्थन किया है । छुआछूतके विषयमें लिखते हुए ब्राह्मणोंको अपशब्द कहे हैं । इस्लामको भारतीय धर्म बताया गया है ।
      वास्तविकता यह है कि ‘कोरोना’कालमें जब मन्दिर लोगोंकी सहायताको अग्रसर हुए, मुसलमानोंने ‘मस्जिदें’ बन्द करनेसे भी मना कर दिया था ।
        ‘द प्रिंट’ एक तथाकथित ‘सेक्युलर’ समाचार वाहिनी है । उसके लेख सनातन विरोधी, मुसलमान विचारधारायुक्त पाए जाते हैं । भारतमें  सनातन विरोधी ऐसी समाचार वाहिनियां प्रतिबन्धित होनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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