अक्तूबर ११, २०१८
राजस्थानके चित्तौडगढके निम्बाहेडा निवासी नन्हे योगी अर्हम जेतावत ऐसे ऐसे योग कर लेते हैं, जिन्हें देख आप भी अचम्भित रह जाएंगे । अर्हम लगभग साढे ४ वर्षकी अल्पायुसे कठिन-से-कठिन योग मुद्राएं कर रहा है और सात वर्षकी आयुमें अर्हम जेतावत योग गुरु बनकर स्वयंके विद्यालयमें पढने वाले बच्चोंके साथ निम्बाहेडाके युवाओंसे लेकर ८० वर्षतकके बुजुर्गोंको भी योग सिखा रहे हैं ।
अर्हमने २५ अप्रैलको बांसवाडामें आयोजित योग शिविरमें योग गुरु बाबा रामदेवके साथ भी मंच साझा किया था । इस मध्य अर्हमकी योग क्रियाएं देख लोग अचम्भित रह गए थे । वहीं मंचपर अर्हमकी प्रतिभाको देख बाबा रामदेव भी उसके अभिभावक बन गए हैं । विश्व योग दिवसपर होने वाले उपखण्ड स्तरीय योगमें भी दो वर्षसे अर्हम अन्य वरिष्ठ योग गुरुओंके साथ मंच सांझा कर रहे हैं । गत ८ माहसे वह प्रतिदिन प्रातः ५.४५ से ७ बजे तक बच्चे, बूढे व महिलाओंको स्थानीय उद्यानमें योग करवा रहे हैं ।
अर्हमने ढाई वर्ष पूर्व पिताके साथ स्थानीय पतंजलि संस्थानके योग कार्यक्रममें भाग लिया था, तब से उसके मनमें योगके प्रति रुझान पैदा हो गया था और कुछ समय पश्चात ही अर्हम योग गुरु बन गया । गत वर्ष इन्दौरमें मध्यप्रदेश और राजस्थानकी अन्तर्राज्यीय योग प्रतियोगितामें वह स्वर्ण पदक जीत चुके हैं । उन्हें ट्रॉफीके साथ २१ सहस्त्र रुपएका नकद पुरस्कार भी मिला था ।
इस वर्ष सबडिवीजन स्तरपर वह सम्मानित हुए हैं । यूडीएच मन्त्री श्रीचन्द कृपलानी सहित जैन जागृति सेण्टर, हेल्प सोसायटी आदि संस्थाएं भी योग गुरु अर्हमको सम्मानित कर चुकी हैं । स्थानीय पदम विद्या विहार विद्यालयमें अध्ययनरत लिटिल योग गुरु अर्हम योगके साथ शिक्षामें भी सबसे ऊपर है । नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और पहली कक्षामें 100 प्रतिशत अंकसे उत्तीर्ण हुआ । वो सफलताका श्रेय पिता विमल और मां प्रियंकाको देते हैं ।
“स्पष्ट है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोणसे एक छोटासा बालक इतना प्रतिभाशाली नहीं हो सकता, परन्तु सनातन धर्ममें शरीर नहीं आत्माका विवेचन है, जो पूर्व जन्मोंके तप इस जन्ममें स्वतः ही ग्रहण कर लेती है । हिन्दू राष्ट्रको ऐसे ही रामराज्यके बालक चलाएंगे !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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