टिकैतने प्रदर्शनस्थलको बताया अपना ग्राम, समर्थकोंको महामारीके भीषण सङ्कटमें डाला टिकैतके हठने


१६ अप्रैल, २०२१
      ‘कोरोना’के भीषण प्रकोपने समूचे विश्वमें गृहबन्दी बढा दी है । प्रत्येक व्यक्ति स्वयं व अन्योंकी प्राणरक्षा हेतु प्रयत्नशील है । इस निमित्त समूहमें एकत्रित होनेकी सर्व गतिविधियां  देशकालपर सर्वत्र टाली जा रही है; किन्तु कथित किसान नेता राकेश टिकैत ऐसी गम्भीर स्थितिमें भी अपने प्रपञ्चको अनवरत चलाए हुए हैं । उनका कहना है कि जैसे वह अपने ग्राममें रहेंगे, वैसे ही ‘यूपी गेट’, ‘सिंघु बॉर्डर’ और ‘टीकरी बॉर्डर’पर भी रहेंगे । उन्होंने कहा है कि आन्दोलन समाप्त नहीं होगा, ये चलता रहेगा । ‘यूपी गेट’, ‘सिंघु बार्डर’ और ‘टीकरी बार्डर’पर ५ माहसे किसान डटे हैं । एक प्रकारसे से यहां किसानोंने अपना ग्राम बसा लिया है । टिकैतसे जब पूछा गया कि गृहबन्दी होगी, तो क्या ग्राममें लोग नहीं रहेंगे ? इसपर टिकैतने कहा कि गृहबन्दी होगी, तो उसके नियमोंका पालन किया जाएगा । गांवोंसे किसान यहां नहीं आएंगे; परन्तु जो यहांपर है, वे यहींपर रहेंगे; आन्दोलन चलता रहेगा ।
     टिकैतकी गतिविधियां व्यापक दुष्परिणामोंकी ओर सङ्केत दे रही हैं, जिसमें हस्तक्षेपकर भंग करना ही उत्तम है; परन्तु विचित्र है कि राम-रहीमके समर्थकोंको उपद्रव न करनेपर गोलियां चलवाकर मरवा दिया जाता है, निर्भयाके लिए राष्ट्रपतिसे न्याय मांगने पहुंचे लाखों छात्रोंको अथक पीटा जाता है, गोरक्षा व गंगाके रक्षणार्थ मांग करनेवाले साधुओंको पीटा जाता है या मरनेके लिए छोड दिया जाता है, तो ऐसे शासकगण एक टिकैत व उसके इस कथित आन्दोलनको क्यों नहीं हटा पा रहे हैं ? क्यों इसे दूसरा ‘शाहीन बाग’ बनाकर उपद्रवकी प्रतीक्षा कर रहे हैं ? मोदी शासन यथाशीघ्र जागे और ‘वोट’की चिन्ता न करते हुए यह छद्म आन्दोलन समाप्त करे, यह सभी राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तियोंकी मांग है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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