महिलाओंका चीरहरण, तोडफोड, अपहरण, हत्या, बंगाल हिंसापर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगकी ‘रिपोर्ट’से उजागर भयावह तथ्य
२७ जुलाई, २०२१
बंगालमें चुनावी परिणामोंकी घोषणाके पश्चात हुई हिंसापर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगने १४ जुलाईको कलकत्ता उच्च न्यायालयमें अपनी ‘रिपोर्ट’ प्रस्तुत की है । आयोगने इस ‘रिपोर्ट’में उन सैकडों घटनाओंका उल्लेख किया जो राज्यमें २ मईके पश्चात घटित हुई ।
आयोगने अपनी ‘रिपोर्ट’में कहा था कि राज्यमें ‘कानूनका शासन’ नहीं, वरन ‘शासकका कानून’ है । इस ‘रिपोर्ट’में राज्य प्रशासनकी कठोर आलोचना की गई थी और कहा गया था कि राज्य प्रशासनने जनतामें अपना विश्वास खो दिया है । ‘रिपोर्ट’के अनुसार, जांचके मध्य दलको राज्यके २३ जिलोंसे १९७९ प्रकरण मिले हैं । इनमें अधिकांश प्रकरण गम्भीर अपराधसे सम्बन्धित थे, जो मुख्यतः कूच बिहार, बीरभूम, बर्धमान, उत्तरी २४ परगना और कलकत्तासे मिलीं, जिनमें अधिकांश प्रकरण दुष्कर्म, छेडखानी व अग्निकाण्डके हैं ।
बंगालकी हिंसासे पुनः सिद्ध होता है कि अराजक तत्त्वोंको नष्ट किए बिना लोकतान्त्रिक पद्धतिसे चुनाव करना कितना निरर्थक है । ऐसी स्थितिका स्थायी समाधान केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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