पश्चिम बंगालमें महिलाओंको प्रतिदिन बलात्कारकी धमकियां, बेटियोंको राज्यसे बाहर भेजनेकी इच्छुक हैं पीडिताएं : राष्ट्रीय महिला आयोगका वक्तव्य
०८ मई, २०२१
पश्चिम बंगालमें विगत रविवारको चुनाव परिणाम आते ही हिंसा तथा बलात्कारकी हृदयविदारक घटनाएं अपने चरमपर पहुंची । राष्ट्रीय महिला आयोगकी सदस्याओंने वहां जाकर पीडिताओंसे घटनाओंके सम्बन्धमें बात की । राष्ट्रीय महिला आयोगकी अध्यक्षा रेखा शर्माने शुक्रवार, ७ मई २०२१ को बताया कि महिलाएं अपने संग हुए अत्याचारपर भयके कारण चुप हैं । उन्हें लगता है कि बोलनेपर उनके साथ और भी दुर्व्यवहार किया जा सकता है ।
तृणमूल कांग्रेसके ‘गुण्डों’पर कांग्रेस, कम्युनिस्ट तथा भाजपाने हिंसाके आरोप लगाए हैं । इस चुनाव प्रक्रियाके कालमें भाजपाके लगभग अनेक कार्यकर्ताओंकी निर्मम हत्या की जा चुकी है ।
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्रका एक दृश्यपट दृष्टिगत हुआ है, जिसमें २ महिलाओंको किसी मार्गपर घसीटकर पीटा जा रहा है । इसी प्रकारकी घटनाओंका संज्ञान लेते हुए महिला आयोगने बताया कि अनेक महिलाओंने घरसे भागकर अपनी प्राण रक्षा की है । तृणमूलके ‘गुण्डों’ने उनसे बलात्कार किए, उनके घरोंको हानि पहुंचाई, कुछ घरोंको जला दिया तो वे घरमें वृद्ध सदस्योंको छोडकर पलायनको विवश हुईं ।
बंगालकी मुख्यमन्त्रीने मतदानके पूर्व ही विपक्षी कार्यकर्ताओंको धमकी दी थी तथा कहा था कि सुरक्षाबलोंको यहांसे जाने दो तब देख लेंगे । उन्हींकी उस धमकीके अनुसार तृणमूलके ‘गुण्डों’ने मतदानके परिणाम आते ही उत्पात किया । मतदानके समय भी वे उपद्रव और हिंसा कर रहे थे । किसी विपक्षी कार्यकर्ताकी माताकी हत्या तो किसी कार्यकर्ताकी बहनसे बलात्कार ।
बंगाली हिन्दू अपने ही घरोंमें सुरक्षित नहीं हैं । स्वतन्त्र भारतमें हिन्दुओंपर ऐसी हिंसा सहन नहीं की जा सकती । ममता बनर्जी यदि बंगालकी अराजकता रोकनेमें अक्षम हों तो राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र विकल्प है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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