‘बायकॉट’ ‘ब्लैकआउट’ और अब ‘ट्रैक्टर परेड’ २६  जनवरीपर अराजकता फैलानेका आगेका कार्य


२३ जनवरी, २०२१
     कथित प्रकारसे नूतन कृषि विधानोंका विरोध कर रहे किसान सङ्गठनोंने इस वर्ष २६ जनवरी अर्थात गणतन्त्र दिवसपर राजधानीमें व्यापक स्तरपर ‘परेड’ निकालनेकी योजना बना रखी है । कहा जा रहा है कि लगभग १ लाख ट्रैक्टरके साथ यह ‘परेड’ निकाली जाएगी । इसको लेकर लोग कई प्रकारकी आशड्का प्रकट कर रहे हैं और किसान सङ्गठनोंके नेताओंके क्रियाकलापोंपर प्रश्न उठा रहे हैं ।
     यह अनुचित भी है । यह सङ्गठन न केवल शासनके साथ बातचीतमें अडियल भाव अपनाए हुए हैं, वरन ‘परेड’को लेकर विधान प्रवर्तन ‘एजेंसी’के आदेशको भी चुनौती दे रहे हैं । इनके ‘परेड’को देहली पुलिसकी अनुमति नहीं है । सुरक्षाकी दृष्टिसे इसी सम्बन्धमें पुलिसने सर्वोच्च न्यायालयका भी द्वार खटखटाया था; परन्तु, ‘कोर्ट’ने ‘ट्रैक्टर रैली’को वैधानिक व्यवस्थासे जुडा प्रकरण बताते हुए कहा कि यह निर्णय करनेका प्रथम अधिकार पुलिसको है कि राष्ट्रीय राजधानीमें किसे प्रवेशकी अनुमति दी जानी चाहिए और किसे नहीं ?
     यहां प्रश्न यह है कि गणतन्त्र दिवसके विषय जब सबको ज्ञात हैं तो यह हठ क्यों हैं ?
     आशड्का प्रकट की जा रही है कि २६ जनवरीको ऐसे प्रयासोंके चलते अराजकता फैलाई जा सकती है । पूर्वमें भी इस प्रकारके प्रयास ‘लिबरल’, कट्टरपन्थी और हिंसक शक्तियां कर चुकी हैं ।
     ३५ वर्ष पूर्व एक ऐसा ही प्रयास सांसद सैयद शहाबुद्दीनने किया था । २३ दिसम्बर १९८६ को अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद ‘कॉन्फ्रेंस’का गठनकर ‘मीडिया’को बुलाया गया और २६ जनवरीका ‘बायकॉट’ करनेका अनुरोध मुसलमानोंसे किया गया । आरम्भमें इस निर्णयपर किसीने ध्यान नहीं दिया; परन्तु  प्रकरण बढता गया । सैयद शहाबुद्दीनने उस वर्ष मुसलमानोंसे गणतन्त्र दिवस समारोहसे पृथक रहनेका वक्तव्य दिया था ।
     आज कृषि आन्दोलनके नामपर देशमें वही परिस्थिति उत्पन्न की जा रही है कि सम्पूर्ण राष्ट्र २६ जनवरीपर ध्यान केन्द्रित करनेके स्थिनपर एक ऐसी ‘रैली’पर ध्यान टिकाए बैठा है, जिसे न पुलिस अनुमति दे रही है और न शासन ही । लोगोंमें सुरक्षाको लेकर सन्देह है । उन्हें भय है कि कहीं देशके लिए इतने महत्त्वपूर्ण दिवस इसका लाभ देशविरोधी शक्तियां न उठा लें !

           राजनीति, स्वार्थ और सत्तालोलुप नेताओंके कारण यह किसान आन्दोलनका प्रकरण बढता ही जा रहा है । क्या इनलोगोंको देशके नागरिकोंको जो असुविधा हो रही है, उसका अंश मात्र भी भान नहीं है । अब इस आन्दोलनको बलपूर्वक दबानेका समय है; क्योंकि कुछ लोगोंकी मूढता देश नहीं भोग सकता ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया



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