केरलमें न्यायाधीश कलाम पाशाने अपनी पत्नीको दिया ‘तीन तलाक’, दण्डसे बचनेके लिए दिनांकमें किया ‘हेरफेर’
१३ फरवरी, २०२१
केरलके पलक्कड जिला सत्र न्यायालयके न्यायाधीश कलाम पाशाकी पत्नीने ‘तीन तलाक’ देनेके सम्बन्धमें उनके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट करानेके लिए केरल उच्च न्यायालयका द्वार खटखटाया है । कलाम पाशाकी पत्नीने यह भी आरोप लगाया है कि कलाम पाशाके भाई और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी. कमाल पाशाने उन्हें धमकी भी दी थी । महिलाके अनुसार, कलाम पाशाने उसे धमकी दी कि यदि उसने उसे ‘तलाक’ देनेसे मना किया तो उसे गम्भीर परिणाम भुगतने पडेंगे । परिवादकर्ता महिलाने कहा कि कलाम पाशाने १ मार्च २०१८ को उनके विरुद्ध ‘तीन तलाक’ जारी किया था । उन्होंने उसी दिन उन्हें इस सम्बन्धमें एक पत्र भी भेजा था; परन्तु कालान्तरमें, उन्होंने उसे एक और पत्र भेजते हुए कहा कि टंकणकी (टाइपिंगकी) त्रुटि थी और मूल तिथि १ मार्च २०१७ थी । महिलाने आरोप लगाया कि यह न्यायिक प्रक्रियाओंसे बचनेका एक प्रयास था, जिस कारण ‘तीन तलाक’के विरुद्ध विधानको लागू करनेसे पहलेकी किसीका उल्लेख किया गया । सर्वोच्च न्यायालयके अनुसार, किसी न्यायाधीशके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट करनेके लिए सम्बन्धित मुख्य न्यायाधीशकी अनुमति आवश्यक है । दो वर्षसे पूर्व, उच्च न्यायालयके संज्ञानमें प्रकरण आनेके पश्चात इसपर प्राथमिक जांच की गई थी । ३० जुलाई २०१९ को भारतकी संसदने विधान पारितकर इसे दण्डनीय अपराध बनाया था । इसे उसी वर्ष एक अगस्तसे लागू भी कर दिया गया । उसने यह भी आरोप लगाया कि कलाम पाशाके भाई और सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमाल पाशाने उसे धमकी दी थी और उसे बताया था कि यदि उसने कलाम पाशाको ‘तलाक’ देनेसे मना दिया तो उसे गम्भीर परिणाम भुगतने होंगे ।
उल्लेखनीय है कि मुसलमान ‘महिला (विवाहपर अधिकारोंका संरक्षण) अधिनियम, २०१९’के अन्तर्गत तीन बार ‘तलाक, तलाक, तलाक’ बोलना अपराध माना गया है ।
ऐसी निकृष्ट मानसिकताके जिहादी जब न्यायाधीश बन जाएं तो ये क्या न्याय देंगे ? जिहादी कितने भी उच्च पदपर बैठे, अपनी इस्लामिक शिक्षाकी ‘छाप’ दिखा ही देता है; अतः ये किसी उच्च पदके योग्य नहीं हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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