११ दिसम्बर, २०२०
साईं बाबा मन्दिर न्यासने कालान्तरमें स्थानीय लोगों व अन्य भक्तोंकी परिवादके (शिकायतोंके) पश्चात मन्दिर परिसरके बाहर एक पटल लगाकर श्रद्धालुओंसे भारतीय संस्कृतिके अनुसार ‘सभ्य’ ढंगसे वस्त्र पहननेंकी याचिका की थी, जिसपर क्रोधित होकर स्वयंको सामाजिक कार्यकर्ता बतानेवाली तृप्ति देसाई और उनके सङ्गठनके अन्य सदस्योंने इसका विरोध करने तथा ‘पोस्टर’को उतारनेका निर्णय लिया ।
‘ट्रस्ट’के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कान्हुराज बागटेने स्पष्ट किया था कि उन्होंने श्रद्धालुओंपर कोई ‘ड्रेस कोड’ लागू नहीं किया है और यह सन्देश मात्र एक विनती है; परन्तु तृप्तिने प्रकरणको जानबूझकर तूल देने और व्यर्थमें इसका विरोध करनेका निर्णय कर लिया, जबकि यह सबको ज्ञात है कि अधिकतम भक्त मन्दिरमें सहज वस्त्र पहनकर ही प्रवेश करते हैं ।
महाराष्ट्रके अहमदनगरमें पुलिसने तृप्ति देसाई और उनके सङ्गठनके अन्य सदस्योंको शिरडी जाते समय मार्गमें बन्दी बना लिया है । वह मन्दिरके भीतर अपने कुछ भी वस्त्र पहननेके अधिकारकी मांग करनेके लिए जा रही थी ।
यह भी बताया जा रहा है कि तृप्ति देसाईको बन्दी बनाए जानेके पश्चात विभिन्न राजनीतिक दलोंके कार्यकर्ताओंने पटाखे फोडकर उत्सव मनाया है ।
यह कोई अनुचित बात नहीं की गई कि थी जो इसका विरोध किया गया, यह तो सामान्य बात है कि मन्दिरमें हमे हमारी संस्कृति अनुसार ही परिधान धारण करने चाहिए; किन्तु ऐसे संस्कारहीन व धर्महीन लोगोंको यह समझमें नहीं आएगा । इन्हें कठोर दण्ड मिलना चाहिए, जिससे कोई भी निधर्मी अन्य ऐसा कार्य पुनः न करे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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