अक्तूबर २६, २०१८
बरेलीके रिछा क्षेत्रमें पंचोंने एक महिलाके विरुद्घ विचित्र आदेश दिया है । इस आदेशने महिलाको उसकी सन्तानसे अलग कर दिया । न्यायके लिए पीडिताने पुलिसके चक्कर काटे, लेकिन केवल निराशा हाथ लगी । आपबीती पंचोंको सुनाई तो उन्होंने ऐसा आदेश सुनाया, जो अचम्भित कर दें । अब पीडिताने समाजसेवी निदा खानसे सहायता मांगी है । वहीं, पुलिसका कहना है कि पीडिताने अब तक कोई परिवाद ही प्रविष्ट नहीं करवाई है ।
पीडिताने बताया कि वर्ष २०१२ में बहेडीके लईकसे उसका निकाह हुआ था; लेकिन २०१५ में दहेज कम देनेके कारण पतिने तलाक देकर घरसे निकाल दिया । तलाकके पश्चात् पीडिता अपने बालकके साथ अपने मायके आ गई और २०१८ में बरेलीमें ही दूसरी विवाह कर लिया; लेकिन अब तीन वर्ष पश्चात् पहला पति लईक पुनः आया और उसका पुत्र छीनकर ले गया ! इसपर पीडिताने पुलिसमें परिवाद की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई । प्रकरण पंचायतमें पहुंचा, तो पंचोंने निर्णय सुनाया है कि वो १५-१५ दिवस दोनों पतियोंके साथ रहे !
पुलिसमें सुनवाई न होनेपर आशा लेकर ‘अर्शी आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी’की अध्यक्षा निदा खानके पास पहुंची और सहायताके लिए समाजसेवीसे प्रार्थना की । पीडिताका कहना है कि वो इसपर कई बार पुलिससे अपनी प्रार्थना कर चुकी है; लेकिन पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही है । पीडिताने बताया कि पुलिसमें परिवाद दी, तीन बार एसएसपीसे भी मिली । उन्होंने कार्यवाहीका आदेश दिया, इसके पश्चात् भी पुलिसने कोई कार्यवाही नहीं की ।
पीडिताने कहा कि परिवाद पंचों तक पहुंची, लेकिन फिर भी न्याय नहीं मिला ! पंचोंने निर्णय सुना दिया कि १५-१५ दिवस दोनोंके साथ रह लो । पीडिताका कहना है, “मैं महिला हूं, कोई सामान नहीं जो विभाजित कर दिया !” वहीं, समाजसेवी निदा खानका कहना है कि वो एसएसपीसे मिल पीडिताको न्याय दिलाएगी । समाजसेविकाका कहना है कि बच्चा काफी छोटा है । उसे मांकी आवश्यकता है, इसलिए बच्चा अर्शीको ही मिलना चाहिए ।
“इसीसे ही इस्लाममें महिलाओंकी वस्तु स्थितिका बोध होता है । शरीयतके नामपर जो धर्मान्ध महिलाओंपर अत्याचार कर रहे हैं, वह सर्वथा अनुचित है व दण्डके पात्र हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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