न्यायालयके आदेशकी अवहेलना अनुचित, ‘ट्विटर’को केन्द्र शासनने भेजा सूचना पत्र 


०४ फरवरी, २०२१
     ‘ट्विटर’पर किसान आन्दोलनपर असत्य समाचार प्रसारित किए गए थे ।  न्यायालयने इसपर आपत्ति लेते हुए ‘कारवां मैगजीन’, अभिनेता सुशान्त सिंह, हंसराज मीणा सहित अनेक ‘हैण्डल्स’पर प्रतिबन्ध लगा दिया था । ‘ट्विटर’ने इन्हें कुछ ही मिनिटोंतक प्रतिबन्धित करनेके उपरान्त पुनः प्रारम्भ कर दिया । इन सभीने ‘मोदी प्लानिंग फार्मर्स जीनोसाइड’ शीर्षकके संग असत्य समाचार प्रसारित किया था । ‘द कारवां इण्डिया’ने एक आन्दोलनकारी किसानकी मृत्यु पुलिसकी गोलीसे हुई ऐसा प्रसारित किया था; जबकि उसकी मृत्यु दुर्घटनामें हुई थी । अन्य ‘हैंडल्स’ने भी इसी प्रकारके असत्य समाचार प्रसारित किए थे ।
    केन्द्रीय ‘इलेक्ट्रॉनिकी’ एवं सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्रालयने ‘ट्विटर’को सूचना पत्र भेजा है कि जिन २५७ ‘यूआरएलएस’ तथा १ ‘हैशटैग’पर प्रतिबन्ध लगानेका उच्चतम न्यायालयने आदेश दिया था, उन्हें पुनः कैसे प्रारम्भ किया गया ? इससे देशमें हिंसाकी आशंका है तथा वैधानिक व्यवस्थामें समस्या हो सकती है । ‘ट्विटर’ने अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताका कारण बताकर आत्मरक्षाका प्रयास किया; परन्तु वैधानिक दृष्टिसे यदि किसी समाचारके प्रसारणसे समाजमें हिंसा अथवा अशान्तिकी आशंका हो तो केन्द्र शासन ऐसे प्रसारण माध्यमोंपर प्रतिबन्ध लगा सकता है । ऐसे समाचार अनेक लोग पढते, ‘लाईक’ करते, ‘रिट्वीट’ करते हैं ।
        भारत शासनके विरुद्ध ‘ट्विटर’ इससे पूर्व भी असत्य समाचार फैला चुका है । विदेशी महिलाएं ग्रेटा, मियां खलीफा तथा गायिका रेहाना जैसोंने ‘ट्विटर’द्वारा असत्य समाचार प्रसारितकर, भारतमें अशान्ति फैलानेका कुप्रयास किया है; अतः ‘ट्विटर’को कठोर शब्दोंमें सूचित करना आवश्यक था और आगे भी भारत शासन इनपर कडाई करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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