देहलीमें ‘ऑक्सीजन वैंडर्स’की ‘कालाबाजारी’, आपणिपर (दुकानपर) ‘उपलब्ध नहीं’का फलक, भ्रमणभाषपर २० सहस्र अग्रिम’, घर पहुंचानेके पश्चात १५ सहस्र
२९ अप्रैल, २०२१
एक ओर ‘कोरोना’ महामारीका प्रकोप है, वहीं दूसरी ओर मानवताको लज्जित करते हुए कई लोग ‘कोविड’ रोगियों एवं उनके परिजनके साथ विश्वासघात करने एवं उनको ठगनेमें किञ्चित भी सङ्कोच नहीं कर रहे हैं । ‘ट्विटर’पर विनायक त्रिपाठी नामक व्यक्तिने लिखा कि ‘दुकानों’पर ‘उपलब्ध नहीं है’का फलक लगाकर रखनेवाले विक्रेता भ्रमणभाषपर इच्छित मूल्यमें ‘ऑक्सीजन’ उपलब्ध करानेका कह रहे हैं । आगे बताते हैं कि कल मैंने ‘सिलेंडरके लिए रणवीर नामक व्यक्तिसे वार्ता की । जब मैंने कहा कि मुझे तुरन्त ‘सिलेंडर’ चाहिए । उसके पश्चात उसने मुझे भ्रमणभाष किया एवं कहा कि आप २० सहस्र भेज दो । मैं ४ घण्टेमें घर पहुंचा दूंगा । १५ सहस्र ‘सिलेंडर’ मिलनेके पश्चात देना ।”
विनायकने बोला, समयका अभाव होनेके चलते मैं स्वयं आकर ले जाता हूं, इसपर रणवीरने प्रत्यक्ष रूपसे कहा कहा कि यदि आप गन्तव्यपर जाओगे, तो उसके द्वारपर हमने स्पष्टतासे ‘उपलब्ध नहीं’ लिखा है; क्योंकि हम पुलिस एवं शासनसे सुरक्षित होकर असंवैधानिक रूपसे विक्रय कर रहे हैं और आपको लेना है लो; अन्यथा मेरे पास लोगोंकी ‘लाइन’ लगी हुई है । यह कहकर उसने भ्रमणभाष बन्द कर दिया ।” ज्ञातव्य है कि २७ अप्रैलको देहली उच्च न्यायालयने ‘सिंलेंडरों’का असंवैधानिक विक्रय रोकनेमें असफल रहनेके लिए देहली शासनको डांट लगाई थी ।
विनायक जैसे युवाके साथ हुआ, यह प्रकरण हमारी व्यवस्थाकी पोल खोलता है । इस आपातकालमें भी लोगोंको भ्रमित करना एवं असंवैधानिक ढंगसे ठगना दर्शाता है कि हिन्दू राष्ट्र इतना आवश्यक क्यों है ? अतः शीघ्रातिशीघ्र हिन्दू राष्ट्र स्थापित होना ही चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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