देहलीमें विस्फोटका षडयन्त्र कर रहे आतंकी पकडे गए, भारतीय सेनामें जाना चाहते थे, मदरसोंके कारण बने आतंकी !!


जनवरी २५, २०१९

 

गणतन्त्र दिवसपर देशको कथित आतंकी आक्रमणका षडयन्त्र देहली पुलिस और सुरक्षा विभागोंने असफल कर दिया । गुरुवार, २४ जनवरी, २०१९ को देहली पुलिसके अधिकारियोंने बताया, “आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मदका कथित सदस्य अब्दुल लतीफ गनी पकडा गया है । आरोप है कि २६ जनवरीको वह राष्ट्रीय राजधानीमें आतंकी आक्रमणके षडयन्त्रमें जुटा था ।”

२० जनवरीको गनी सहित दो जैशके कथित आतंकी पकडे गए । सुरक्षा विभागको एक गुप्त सन्देशका भान हुआ था, जिसमें आतंकियोंकी ओरसे कहा गया था, “कुछ बडा होना चाहिए, हिन्दुस्तानको रोना चाहिए ।” इसके पश्चात उन्होंने आतंकियोंकी योजनाको असफल कर दिया ।

मूलरूपसे घाटीके रहनेवाला गनी हो सकता है कि भारतीय सेनाका अंग बन जाता; परन्तु उसने सोपोरके जामिया अरबिया दारुल उलूम मदरसेमें मुफ्ती बननेके प्रशिक्षणके मध्य अपनी राह परिवर्तित कर ली । वह वहां लगभग चार वर्ष रहा था ।

डीसीपी प्रमोद कुशवाहाने ‘टीओआई’से कहा कि मदरसेमें ही गनीकी भेंट कट्टरपन्थी तत्त्वोंसे हुई थी, जिन्होंने उसे जिहादके नामपर आतंककी राहपर जानेके लिए भडकाया । डीसीपीके अनुसार , “गनी सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर उन तत्त्वोंसे सम्पर्कमें रहता था । उनके लेखसे प्रेरित भी होता ।”

२०१६ में गनी दो बार बन्दी बनाया गया था, जिससे पहले गंदरबालमें हिंसाके समय उसका अभिज्ञान पत्थरबाजके रूपमें किया गया था । आधिकारिक रूपसे जैशमें उसे एक वर्ष पूर्व लाया गया और तब उसे जनपदका अधिकारी बनाया गया था ।

महाराष्ट्रके नांदेडमें किसी मो.पाशाने भी उससे चलभाषपर सम्पर्क साधा था । पाशा उसके बाद देहली आया, जहां उसने जैश अधिकारियोंके नामके तीन ‘स्टैंप’ तैयार किए और उन्हें तीन जनवरीको गनीको सौंपा । इन ‘स्टैंप्स’को विस्फोटके लिए प्रयोग किया जाना था ।

गनीने जैशके लिए मुजाहिदोंकी भर्ती की, जिसमें हिलाल अहमद भट्ट, बिलाल भाटी, शाहबाज और आसिफ हैं । गनीको सबसे पहले मौजने श्रीनगर और निकटवर्ती क्षेत्रोंमें ग्रेनेड विस्फोट करनेको कहा था, जिसके पश्चात उसे कुछ ऐसे ही विस्फोट देहलीमें करनेके लिए बोला गया ।

कश्मीरमें डीसीपी कुशवाहा, एसीपी अत्तर सिंह और इंस्पेक्टर शिवकुमारके संयुक्त पुलिस दलने ७२ घंटोंतक छापेमारी कीं, जिसके पश्चात दो स्थानोंको चिह्नित किया गया । कई अवसरोंपर घेराबंदी और अभियानके समय दलपर स्थानीय लोगोंने पत्थरबाजी भी कर दी थी ।

 

“स्पष्ट है कि सब आतंकियोंका मूल मदरसे हैं और जबतक हिन्दुस्तान उनपर पूर्णतया प्रतिबन्ध नहीं लगा देता है भारतमें आतंकको रोकना असम्भव है; क्योंकि नित्य एक नूतन आतंकी तैयार होता है और प्रशासनको इतने प्रकरणोंके पश्चात भी यह सरलसा तथ्य क्यों नहीं दिखाई देता है । भाजपा शासन स्मरण रखें कि कितना ही तुष्टिकरण करें आतंकी उन्हें वोट नहीं डालेंगें तो राष्ट्रहितमें कार्य कलना ही उत्तम है और हिन्दुस्तानसे सभी मदरसे बन्द हों, यही राष्ट्रहित है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : जनसत्ता



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