उद्धव शासन क्रय करेगा विदेशी ‘वैक्सीन’, महाराष्ट्रमें फैले कुप्रशासनके मध्य स्वास्थ्य मन्त्रीकी घोषणा 


२२ अप्रैल, २०२१
     महाराष्ट्रमें ‘रेमडेसिविर’की आपूर्तिके प्रकरणमें दमनकी ‘फार्मा कंपनी’ ‘ब्रुक फार्मास्युटिकल्स’के संचालकके साथ विवाद करनेके पश्चात महा विकास अघाडी शासनने यह घोषणा की कि वह विदेशी ‘वैक्सीन’का आयात करेगा और ‘वैक्सीनेशन’ कार्यक्रमको आगे बढानेके लिए सभी विभागोंको दी जानेवाली निधिमें भी कटौती करेगा ।
      सभी वयस्कोंको ‘वैक्सीन’ उपलब्ध करानेके निर्णयका स्वागत करते हुए महाराष्ट्रके स्वास्थ्य मन्त्री राजेश टोपेने कहा कि उनके शासनने एक ‘अनुकरणीय’ ‘वैक्सीनेशन’ कार्यक्रम आरम्भ करनेका निर्णय लिया है । उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पडी तो राज्य शासन सभी विभागोंके व्ययमें कटौती भी कर सकता है ।
‘इंडियन एक्स्प्रेस’के अनुसार, टोपेने कहा कि १८-४५ वर्षकी आयुके व्यक्ति शासकीय चिकित्सालयोंमें ४०० रुपए और निजीमें ६०० रुपएकी दरसे ‘वैक्सीन’ ले सकते हैं । उन्होंने कहा कि वर्तमानमें ‘कोविड वैक्सीन’के रूपमें ‘कोविशील्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ उपलब्ध हैं; परन्तु आवश्यकता होनेपर अन्य ‘वैक्सीन’का आयात किया जाएगा । टोपेने यह भी कहा कि उनका शासन विदेशी ‘वैक्सीन’ ‘स्पूतनिक’, ‘फाइजर’ और ‘मॉडर्ना’ क्रय करनेपर भी विचार कर रहा है । टोपेने बताया कि उनका शासन ७ लाख लोगोंका प्रतिदिन टीकाकरण करना चाहता था; परन्तु ‘वैक्सीन’की आपूर्तिमें न्यूनताके कारण मात्र ३ लाख लोगोंको प्रतिदिन ‘वैक्सीनेट’ कर पाया ।
विपक्षी दलोंपर आरोप मढने और अपनी असफलताओंको छुपानेके लिए महा विकास अघाडीके नेताओंने प्रयास किए । साकेत गोखलेने आरोप लगाया कि देवेन्द्र फडनवीसके द्वारा क्रय की गई ‘रेमडेसिविर’ गुजरातके लिए थी न कि महाराष्ट्रके लिए । यद्यपि, महाराष्ट्रके ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन मन्त्री और एनसीपी नेता राजेन्द्र सिंगणेने अपने शासनके मन्त्रियों और नेताओंके ‘दावों’की पोल खोल दी । ‘न्यूज १८’को दिए एक साक्षात्कारमें उन्होंने कहा कि भाजपाके नेता औषधि निर्माताओंके साथ उनके पास आए थे और ‘रेमडेसिविर’के क्रयमें सहायता करनेका अनुरोध किया था ।
     महाराष्ट्रके महा विकास अघाडी नेताओंका भ्रष्टाचार चरम सीमापर है, जहां देशके अन्य राज्योंमे ‘वैक्सीन’ निःशुल्क लग रही है और महाराष्ट्रमें उसका मूल्य लिया जा रहा है । पहले राज्यके गृहमन्त्रीका प्रतिमाह १०० करोडकी ‘रंगदारी’ मांगनेका प्रकरण और अब भारतीय निर्माताको बन्दी बनाना, उसके पश्चात विदेशी ‘वैक्सीन’के आयातकी घोषणा स्वयंमें ही बताती है कि ‘दालमें कुछ काला है ।’ यह शासन किसी भी प्रकारसे सत्तामें रहने योग्य नहीं है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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