अप्रैल २४, २०१९
उत्तरी पश्चिमी देहलीसे भाजपाके टिकटपर सांसद बने उदित राज कांग्रेसमें सम्मिलित हो गए हैं ! भाजपाने मंगलवार, २३ अप्रैलको उदित राजका टिकट काट दिया था । उत्तर पश्चिमी लोकसभा सीटकेलिए टिकट जारी करनेमें हुई देरीके पश्चात ही उदित राज पार्टीसे विरुध्द चल रहे थे । उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यदि उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो वो भाजपाको छोड देंगें । टिकट काटनेके पश्चात उन्होंने अपने ट्विटर खातेसे अपने नामसे ‘चौकीदार’ शब्द हटा लिया था । इसके पश्चात बुधवार, २४ अप्रैल दोपहरतक उन्होंने पुनः अपने नाममें ‘चौकीदार’ लगा लिया, तब लोगोंको लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है और उदित राज मान गए हैं; परन्तु अब उनके कांग्रेसमें सम्मिलित होनेका समाचार आ रहा है । वैसे उदित राजने पहले ही कहा था कि उन्हें राहुल गांधी और केरीवालने टिकट कटनेको लेकर पहले ही चेताया था ।
इससे ज्ञात होता है कि वो सम्भवतः पहलेसे ही आम आदमी पार्टी और कांग्रेसके साथ सम्पर्कमें थे । उत्तर पश्चिमी देहलीसे भाजपाने पंजाबी गायक व सूफी संगीतके लिए प्रसिद्ध हंसराज हंसको अपना प्रत्याशी बनाया है । वाल्मीकि समुदायसे आनेवाले हंसराज हंस कांग्रेससे भाजपामें आए हैं । उन्हें टिकट देनेके लिए भाजपाने उदित राजका टिकट काटा है । उदित राजके टिकट कटनेके पीछे कई कारण थे ।
उदित राज निरन्तर विवादित वक्तव्यको लेकर चर्चामें रहे हैं । उन्होंने कांग्रेसमें सम्मिलित होनेके पश्चात कहा कि उन्हें अब प्रसन्नताका अनुभव हो रहा है । चूंकि कांग्रेस देहलीके सातों सीटोंसे प्रत्याशियोंके नामोंकी घोषणा कर चुकी है, ऐसेमें उदित राजके देहलीसे चुनाव लडनेकी सम्भावना नहीं है । अब देखना है कि कांग्रेसमें उन्हें कौनसा पद दिया जाता है ?
“उदित राज अपने निराधार वक्तव्योंके लेकर समाचारोंमें बने रहे हैं । महिषासुरका महिमामण्डनकर मां दुर्गाका अपमान करना हो, या अन्य विषय, उदित राज समय-समयपर समाजको विभाजित करनेके वक्तव्य देते रहे हैं । नेता समाजके कल्याणके लिए होता है और अकर्मण्य और समाजको विभाजित करनेवाले नेताओंको तो त्वरित बाहर करना चाहिए । उदित राज टिकटकी मांग किस अधिकारसे कर रहे हैं ? देहलीका कोई एक प्रकरण बताएं, जो उन्होंने जनताके हितमें संसदमें उठाया हो ! अपने नामके आगे ‘चौकीदार’ हटाना, जोडना और फिर हटाना, यह इन नेताओंकी स्वार्थकी वृत्तिको उजागर करता है और यह आजके नेताओंका सत्य भी उजागर करता है कि इनका उद्देश्य केवल स्वार्थ है तो ऐसेमें ये जनहितके कार्य कैसे कर पाएंगें ? ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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