‘आईडिया ऑफ भारत’पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोगके पाठ्यक्रममें बाबरको लिखा आक्रान्ता : औवेसी क्रोधित, समाचार वाहिनियोंका रुदन 


२६ मार्च, २०२१
   विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एक संवैधानिक इकाई है, जिसके विश्वविद्यालयोंमें उच्च शिक्षा सम्बन्धी कार्यकलापोंमें मुख्य भूमिका होती है । इस इकाईने ‘बीए’ इतिहासके पाठ्यक्रमको प्रकाशित किया है, जिससे अनेक बुद्धिजीवी नेता व्यथित हैं ।
   ‘बीए’ इतिहासका प्रथम प्रश्नपत्र ‘आइडिया ऑफ भारत’पर आधारित है, जिसमें भारतवर्षकी अवधारणा, कला-साहित्य, धर्म, विज्ञान, जैन तथा बौद्ध साहित्य, वेद, उपनिषद, महान ग्रन्थ, जैन, बौद्ध साहित्य, भारतीय अंक पद्धति एवं गणित व समुद्री व्यापार आदि सम्मिलित हैं । इस पाठ्यक्रमका उद्देश्य छात्रोंको प्राचीन भारतकी संस्कृति, समाज, धर्म पद्धति तथा राजनीतिक इतिहाससे परिचित करवाना है ।
    इसमें सिन्धु-सरस्वती सभ्यताकी व्याख्या की गई है । हिन्दुओंमें भेद उत्पन्न करनेके लिए प्रचलित की गई आक्रमणकी किंवदन्तीको भी अस्वीकृत किया गया है । विशेष यह कि इसमें बाबर तथा तैमूरलंग जैसे आक्रमणकारियोंको आक्रान्ता ही स्वीकार किया गया है । अभीतक उनके आक्रान्ता होनेके सत्यको स्वीकार नहीं किया जाता था ।
   इस सत्यसे वामपन्थी तथा औवेसी जैसे नेता व्यथित हैं । इसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघका षड्यन्त्र बता रहे हैं । वामपन्थी इसे शिक्षाका भगवाकरण बता रहे हैं । ऐसे शिक्षक तथा विद्यार्थीको भय है कि इससे मुसलमानोंके शासनकालकी महत्ता समाप्त हो जाएगी । औवेसी कह रहे हैं कि भाजपा अपनी हिन्दुत्वकी विचारधाराको पाठ्यक्रममें सम्मिलित करनेके उद्देश्यसे मुसलमानोंके इतिहासको मलिन कर रही है ।
    अभीतक भारतीय इतिहासके पाठ्यक्रम वामपन्थी इतिहासकारोंद्वारा लिखे गए असत्य इतिहासपर आधारित रहे हैं, जिसमें विद्यार्थियोंने अकबरको ‘अकबर महान’ ही पढा है । टीपू सुल्तान हो या अन्य मुगल शासक, सभी हिन्दूहन्ता रहे हैं । सहस्रों हिन्दुओंकी निर्मम हत्या, लाखों हिन्दू महिलाओंके साथ यौन अपराध करनेवाले इन शासकों तथा इनके सेनापतियोंके इतिहासका सत्य छुपाकर इन्हें महिमामण्डित किया गया है । ऐसेमें सत्यको स्वीकारता सत्य पाठ्यक्रम स्वागतयोग्य है । इससे हमारे विद्यार्थी सत्यसे अवगत होंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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