देवताकी ऊंची प्रतिमा शास्त्र विरुद्ध !!


आजकल अनेक लोग बहुत ही अधिक ऊंचाईकी देवी या देवताकी प्रतिमा बनाते हैं और इसमें वे अपना बडप्पन भी समझते हैं ! जैसे अभी अयोध्यामें श्रीराम भगवानकी अत्यधिक ऊंची प्रतिमा स्थापित करनेकी योगी शासनकी योजना चल रही है; किन्तु यह शास्त्र विरुद्ध है ! आज हिन्दुओंको धर्मशिक्षण नहीं दिया जाता है; इसलिए अधिकांश हिन्दू मूर्तिविज्ञानसे भी अनभिज्ञ हैं ! देवी-देवता पूजनीय हैं, उनके स्वरूपके साथ दैवी स्तरके सर्व तत्त्व सहवर्ती होते हैं ! शास्त्र कहता है, देवी-देवताओंको न ही सजावटके रूपमें और न ही प्रदर्शनके रूपमें स्थापित करना चाहिए ! उनकी स्थापना छ: फीट तक करनेकी अनुमति शास्त्र देता है; क्योंकि इससे अधिक आकार होनेपर उनका पञ्चोपचार या षोडशोपचारसे पूजन करनेमें कठिनाई होती है ! प्रतिदिनके सामान्य पञ्चोपचार पूजन करते समय भी हम जैसे किसी अतिथिका सत्कार करते हैं, वैसे ही उनका भावपूर्वक सत्कार करनेका शास्त्रीय विधान है ! किन्तु यदि अति विशाल प्रतिमा हो तो उसका पूजन करना कठिन होता है और बिना पूजनके वह प्रतिमा या तो देवत्वहीन हो जाती है या देवताके गण अपने आराध्यकी उचित पूजा-आराधना न होते देख यजमानको शापित भी कर सकते हैं और प्राण-प्रतिष्ठित प्रतिमाकी तो प्रतिदिन विधिवत शास्त्रोक्त पद्धतिसे पूजन होना ही चाहिए ! – तनुजा ठाकुर



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