जिहादी नूर मुहम्मद और उसके साथी करते थे रोहिंग्या-बांग्लादेशी महिलाओं और बच्चोंके विक्रयका कार्य, ३६ घण्टेके पश्चात बनाए गए बन्दी


२८ जुलाई, २०२१ 
      उत्तर प्रदेश पुलिसने विस्तृत स्तरपर चलाए जा रहे मानव ‘तस्करी’के बडे और सुसंगठित समुदायका रहस्योद्घाटन किया है । उत्तर प्रदेश ‘एटीएस’के ३० से अधिक अधिकारियोंद्वारा ३६ घण्टेसे भी अधिक समयतक ‘ऑपरेशन’ चलाकर तीन लोगोंको बन्दी बनाया गया है ।
      इस घटनामें ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’कर उत्तर प्रदेशके ‘डीजी’ने (विधान व्यवस्थाने) बताया, “एटीएसकी निरीक्षणके मध्य यह ज्ञात हुआ कि मानव ‘तस्करी’के इस समुदायका मुखिया नूर मोहम्मद अथवा नूर इस्लाम कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकोंको लेकर ब्रह्मपुत्र मेलसे देहली आ रहा है; इसके पश्चात गाजियाबाद ‘रेलवे स्टेशन’पर ‘एटीएस’के समूहने पांच व्यक्तियोंको उतारकर उनसे पूछताछ की । वह इन लोगोंको विवाह, चाकरी (नौकरी) और सर्वश्रेष्ठ जीवनका लोभ देकर लाता था और यहां विक्रय कर देता था । इसके स्थानपर उसे बडी मात्रामें ‘फंडिंग’ हो रही थी ।”
      ‘डीजी’ने आगे कहा, “पूछताछके मध्य नूर मोहम्मदने बताया कि उसका एक अन्य साथी उसे देहली ‘रेलवे स्टेशन’पर लेनेके लिए आएगा; इसके पश्चात हमने उसे भी अभिरक्षामें (हिरासतमें) लिया । दो लडकियोंको बचाया गया, जो अवयस्क हैं । इनमेंसे एक १६ वर्ष और दूसरी १८ वर्षकी है । दोनों ही म्यांमारकी रहनेवाली है । इनको लखनऊके आशा ज्योति केन्द्र भेज दिया गया है ।”
       उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशंसाकी पात्र है, उनकी सतर्कताके कारण ही मानव ‘तस्करी’ करनेवाले जिहादियोंको बन्दी बनानेमें सफलता प्राप्त हुई है । ऐसी ही सतर्कता; यदि अन्य राज्योंकी पुलिस भी रखे तो इन ‘तस्करों’को मूलसे (जडसे) समाप्त किया जा सकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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