अक्तूबर १०, २०१८
योगी शासनने उर्दू अध्यापकोंकी भर्तीको लेकर चौकाने वाली घोषणा की है । उर्दू शिक्षकोंकी भर्ती मुख्यमन्त्री अखिलेश यादवके शासनमें आरम्भ हुई थी । अब इस भर्तीको रद्द कर दिया है । यह घोषणा उत्तरप्रदेशके बेसिक शिक्षा विभागके अपर मुख्य सचिवने (एडिशनल चीफ सेक्रेटरी) की है । यह भर्ती उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषदके अन्तर्गत आरम्भ किया गया था । विवरणके अनुसार भर्तीको इसलिए रद्द किया गया; क्योंकि विभागको उर्दू अध्यापकोंकी आवश्यकता नहीं है; इसलिए नूतन भर्तियोंकी कोई आवश्यकता नहीं है ।
वर्ष २०१६ में उत्तरप्रदेशमें कुल १६४६० अध्यापकोंकी भर्ती निकाली गई थी, जिसमें ४००० पद उर्दूके अध्यापकोंके लिए थीं । १५ दिसम्बर २०१६ को अखिलेश यादवके शासन कालमें प्राथमिक विद्यालयोंके लिए उर्दू शिक्षकोंकी भर्ती आरम्भ हुई थी । २३ मार्च २०१७ को योगी शासनने भर्ती प्रक्रियाको रोक दिया । इसे एक वर्ष तक आगे नहीं बढाया गया । इस कारण उम्मीदवार उच्च न्यायालय गए । उच्च न्यायालयने भर्ती प्रक्रियाको पूर्ण करनेके लिए मूल शिक्षा विभागको निर्देश दिया । यद्यपि, मूल शिक्षा विभागके अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रभात कुमारने सोमवारको कहा कि प्राथमिक विद्यालयोंमें बडी संख्यामें उर्दू शिक्षक कार्य कर रहे हैं, यही कारण है कि भर्तीकी आवश्यकता नहीं थी ।
“जिस भाषाका न कोई वैज्ञानिक आधार है और संस्कृत सदृश देवभाषाको छोड जब किसी अन्य निरर्थक भाषाको तुष्टिकरणके आधारपर प्रोत्साहन दिया जाता रहा हो, उसे बन्द करना ही उचित है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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