दोसे अधिक बच्चे तो निरस्त हो आरक्षण और मताधिकार, उत्तर प्रदेशके जनसङ्ख्या नियन्त्रण विधानके पक्षमें ९७ प्रतिशत लोग
३१ जुलाई, २०२१
उत्तर प्रदेश जनसङ्ख्या (नियन्त्रण, स्थिरीकरण एवं कल्याण) अधिनियम २०२१ का प्रारूप सिद्ध (तैयार) करनेमें व्यस्त राज्य विधि आयोगको अधिकतर लोगोंने जनसङ्ख्या नियन्त्रणके लिए कठोर विधान बनानेकी सम्मति दी है । प्रारूपपर प्राप्त सुझावोंके आधारपर आकलन करें तो बहुमत कठोर जनसङ्ख्या विधानके पक्षमें स्थित दिखाई देता है । विशाल सङ्ख्यामें लोगोंने आयोगके सुझावोंसे भी अधिक कठोर प्रावधानोंकी आवश्यकता बताई है ।
आयोगने सुझावित प्रारूपमें ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’को प्रोत्साहित करने तथा दोसे अधिक बच्चोंवाले माता-पिताको कुछ शासकीय सुविधाओंसे वञ्चित करनेका प्रावधान किया है । आयोगके जालस्थलपर (वेबसाइटपर) ‘अपलोड’ किए गए प्रारूपपर प्राय: ८५०० सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिसमें ३०० के निकट विधानके विरोधमें हैं । आठ सहस्रसे अधिक सुझाव जनसंख्या विधानके पक्ष में हैं, जिसमें ऐसे सुझावोंकी संख्या अधिक है जो अधिक कठोर विधानके पक्ष में हैं । अधिक संख्यामें लोग आशावान हैं कि दोसे अधिक बच्चेवाले लोगोंको आरक्षणसे वञ्चित कर दिया जाए । इसी प्रकार कई लोगोंने दोसे अधिक बच्चोंके माता-पिताको मताधिकारसे ही वञ्चित किए जानेका सुझाव दिया है।
आयोगने अपने सुझावमें दो से अधिक बच्चोंके माता-पिताको केवल स्थानीय निकायका चुनाव लडनेसे रोकनेका प्रावधान किया है, जबकि प्राप्त सुझावोंमें यह प्रतिबन्ध विधानसभा और लोकसभा चुनावमें भी लागू किए जानेकी आवश्यकता बताई गई है । इसी प्रकार कई लोगोंने दो से अधिक बच्चोंके माता-पिताको निःशुल्क ‘राशन’ एवं अन्य शासकीय सुविधाएं भी न देनेका सुझाव दिया है । अभी आयोग सभी प्राप्त सुझावोंको श्रेणीबद्ध वितरितकर उनपर विचार-विमर्श कर रहा है, जिसमें सुझावसे जुडे विधिक दृष्टिकोणको भी परखा जा रहा है । माना जा रहा है कि ‘एक्ट’का प्रारूप अगस्त माहमें प्रदेश शासनको सौंपा जा सकता है ।
उत्तर प्रदेशके लोगोंने जनसंख्या विधानको लेकर जो स्पष्ट विचार रखे हैं, यह प्रदेशके सर्वाङ्गीण विकासके लिए शुभ सङ्केत है । अन्य राज्योंको भी इससे प्रेरणा लेकर अपने राज्यके भविष्यको देखते हुए ऐसा ही कठोर विधान बनाना चाहिए, जिससे भारतमें जो जनसङ्ख्या विस्फोट हो रहा है, उसको समय रहते प्रतिबन्धित किया जा सके । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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