पूर्व ‘डीआरडीओ’ प्रमुख वीके सारस्वतने कांग्रेसकी सत्यता की उजागर, ‘यूपीए’ शासनने नहीं दी थी ‘मिशन शक्ति’को अनुमति !!


मार्च २७, २०१९

नीति आयोगके वर्तमान सदस्य वी.के. सारस्वत ‘रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन’के (डीआरडीओ) पूर्व प्रमुख हैं । उन्हींके कार्यकालमें ‘एंटी सैटेलाइट मिसाइल’ तकनीकपर काम आरम्भ हुआ था । दैनिक जागरणके विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजनके साथ वार्तामें उन्होंने बुधवार, २७ मार्चको पीएम नरेंद्र मोदीकी ओरसे राष्ट्रीय प्रसारणमें घोषणा किए ‘मिशन शक्ति’से सम्बन्धित कुछ जानकारी साझा की ।

प्रश्न – मिशन शक्तिका भारतीय रणनीतिमें क्या महत्व है ?
उत्तर : भारतके लिए ‘मिशन शक्ति’ उसीप्रकारका महत्व है, जैसा अटल बिहारी वाजपेयी शासनकी ओरसे किया गया परमाणु परीक्षण था । यह विश्वको भारतकी तकनीकी क्षमतासे अवगत कराता है और साथ ही हमारी रणनीतिक क्षमताको सशक्त करता है । यह अंतरिक्ष विज्ञानमें हमारी असीमित क्षमताको बताता है, जिसका प्रभाव बादमें दिखाई देगा । आपको बता दूं जब भारतने प्रथमबार अग्नि मिसाइलका परीक्षण किया था तो हमारे ऊपर अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबन्ध लगाए गए थे; परन्तु अब हमारे पास इस क्षेत्रकी सबसे आधुनिक तकनीक है । ‘मिशन शक्ति’ यह भी बताता है कि अब दूसरा कोई भी देश भारतकी अंतरिक्ष परिसम्पत्तियोंको (स्पेस एसेट्स) हानि पहुंचानेका साहस नहीं कर सकता; क्योंकि उसे ज्ञात होगा कि हम भी उसे उतना ही भारी हानि पहुंचा सकते हैं ।

प्रश्न : क्या यह बात सत्य है कि जब आप ‘रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन’के प्रमुख थे, तब आपने इसी तकनीकीके लिए तत्कालीन यूपीए शासनसे अनुमति मांगी थी और आपको अनुमति नहीं दी गई थी ?

उत्तर : हां, हमने इस बारेमें तत्कालीन शासनके सम्बन्धित मन्त्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा परामर्शदातासे बात की थी । अपना निवेदन रखा था । हमें अतिरिक्त वित्तीय संसाधन और शासनकी स्वीकृतिकी आवश्यकता थी, जो हमें नहीं दी गई । यदि उस समय यह स्वीकृति दी गई होती तो वर्ष २०१५ तक हम ‘एंटी सैटेलाइट मिसाइल’ क्षमता प्राप्त कर लिए होते ।

मुझे लगता है कि प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभालने इस तकनीकीकी आवश्यकता समझी कि यह भारतके लिए कितना आवश्यक है । मोदी पहले ही कह चुके हैैं कि रक्षा क्षेत्रमें जो भी तकनीककी आवश्यकता है, उसे प्राप्त किया जाना चाहिए और उसमें देरी नहीं होनी नहीं चाहिए ।

 

“कांग्रेस शासनने राष्ट्रीय सुरक्षाकी इस महत्वपूर्ण तकनीकके लिए अनुमति नहीं दी थी, क्या कांग्रेस इसका उत्तर देशको दे सकती है कि ऐसा क्यों किया गया ? न ही सैन्य क्षैत्रमें, नही शस्त्रोंके विक्रयमें, न ही अन्तरिक्षमें, न ही साधारण जनताके किसी प्रकरणपर, यदि किसीपर कुछ काम किया ही नहीं तो अब कांग्रेस किस आधारपर वोट मांगने जा रही है ? क्या केवल इस आधारपर कि हम १०० वर्षोंसे अधिक प्राचीन राजनीतिक दल हैं !! अब यह निर्णय भारतीयोंको ही करना है कि उन्हें क्या चुनना है एक निष्क्रिय राजनीतिक दल, जिसके कृत्योंका भुगतान आजतक देश प्रत्येक क्षेत्रमें कर रहा है अथवा एक कर्मनिष्ठ व्यक्ति ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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